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अपने कार्य को सिद्ध करने के लिए विभाग ने ही काट डाले चीड़ के हरे पेड़

रेणुका गौतम
जनप्रतिनिधियों ने लगाया एफआरए 2006 नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप
बंजार : ग्रेट हिमालयन नैशन पार्क विभाग द्वारा गुशैनी गांव में विकास के नाम पर एफआरए 2006 कानून की धज्जियां उड़ाई गई है । एक तरफ वन बंदोबस्त 1884 में एक अंग्रेज अधिकारी एंैडरसन अपनी सुविधा के लिए वन विभाग को पूरे जंगलों का मालिक बना दिया है यह तो विभाग एवं प्रशासन को मान्य है । तो दूसरी तरफ वर्ष 2006 में एफआरए 2006 कानून के तहत भारतीय संसद ने जनहित में जनता को इन जंगलों का मालिक बना दिया है । परंतु वन विभाग इस कानून का पालन करता नहीं दिख रहा।

इस बात का जीता जागता उदाहरण गांव गुशैनी की बिहाली नामक स्थान में दिख रहा है । “यहां पर जीएचएनपी के कर्मचारियों ने चीड़ के लगभग 10 हरे पेड़ को विकास के नाम पर बलि चढ़ा दिए हैं । क्योंकि विभाग स्थान पर बीईओ कार्यालय बनाना चाहता है । एफसीऐ कानून 2006 के मुताबिक हर तरह के विकासात्मक कार्य करने के लिए सभी विभागों को स्थानीय एफआरसी की ग्रामसभा की मंजूरी लेनी पड़ती है। नियमानुसार मंजूरी के पश्चात ही कार्य आरंभ किया जा सकता है।

इसी प्रक्रिया के तहत सभी विभाग ग्रामीण सड़कों तथा अन्य सभी विकासात्मक कार्यों को कर रहे हैं”, यह आरोप शरची पंचायत के पूर्व प्रधान हरि सिंह व एफसीए कमेटी के अध्यक्ष एंव पूर्व प्रधान स्वर्ण सिंह ने विभाग पर लगाया है । उन्होंने कहा कि अनापत्ति प्रमाण-पत्र के न होने पर इन हरे पेड़ों पर विभाग ने कैसे कुल्हाड़ी चला दी है? जो एफसीऐ 2006 कानून का उल्लंघन किया गया है। इस स्थान से लगभग 100 मीटर की दूरी पर गांव गुशैनी में ही बीओ कार्यालय बठाहड ब्लॉक के लिए बनाने जा रहे हैं। जहां पर खुदाई शुरू कर दी गई है ।

उपरोक्त जनप्रतिनिधियों का प्रश्न यह है कि क्या बठाहड में इसके लिए भूमि उपलब्ध नहीं है ? बठाहड ब्लॉक का बीओ गुशैंणी में क्यों रहे ,क्या इस निर्माण के लिए स्थानीय एफआरसी की ग्रामसभा की मंजूरी आवश्यक नहीं है ? यह कार्य विभाग केवल अपने लिए या फिर जनता के लिए करता है क्या विभाग की तुगलकी कार्यशैली और मनमानी के कारण एफआरए कानून 2006 का उल्लंघन नहीं है? क्या संसद द्वारा बनाया गया कानून वन विभाग पर लागू नहीं होता क्या वन विभाग जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है? उपरोक्त लोगों के अनुसार एफआरए 2006 कानून जब पूरे भारतवर्ष के लिए बनाया गया है । तो क्या वन विभाग को इसके दायरे से बाहर रखा गया है? इस तरह के अनगिनत प्रश्न लोगों के जहन में उठ रहे हैं । जिनका उत्तर देना और निराकरण करना विभाग और प्रशासन का दायित्व बनता है ।
ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क डीएफओ सुनीत भारद्वाज के अनुसार वन विभाग की भूमि पर वीओ कार्यलय का कार्य हो रहा है । इस लिए विभाग के कार्य हेतू एफसीए की अनुमति लेने की जरूरत नहीं पडती है ।

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