हिमाचल प्रदेश सरकार ने चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थों के खिलाफ अपनी शून्य सहिष्णुता नीति को सख्ती से लागू करते हुए एनडीपीएस एक्ट के मामलों में संलिप्त पाए गए 11 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कड़ी कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत की गई है, जो यह स्पष्ट संकेत देती है कि सरकार नशा तस्करी और अवैध गतिविधियों के प्रति किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं करेगी।
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में विभिन्न इकाइयों और जिलों में तैनात एक इंस्पेक्टर सहित कई कांस्टेबल और चालक शामिल हैं। ये कर्मचारी भारतीय रिजर्व बटालियन, एसडीआरएफ, स्टेट सीआईडी, एसवी एंड एसीबी तथा जिला पुलिस में सेवाएं दे रहे थे। सरकार का कहना है कि कानून की रक्षा करने वाले विभाग में रहते हुए कानून तोड़ना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
शिमला में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि चिट्टा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन यदि सरकारी कर्मचारी ही इस अवैध कारोबार में शामिल पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कदम उठाना अनिवार्य हो जाता है। उन्होंने दो टूक कहा कि चिट्टा तस्करी और नशे के अवैध कारोबार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद या विभाग से जुड़ा क्यों न हो।
बैठक में पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने चिट्टा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि नशा तस्करी और चिट्टा गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शीघ्र मुख्य सचिव को सौंपी जाए। इसके साथ ही चिट्टे से अर्जित की गई संपत्तियों की भी विस्तृत जानकारी सरकार को देने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने आम जनता से भी इस अभियान में सहयोग की अपील करते हुए सूचना देने पर आकर्षक इनाम की घोषणा की। दो ग्राम तक चिट्टे की सूचना देने पर 10 हजार रुपये, पांच ग्राम पर 25 हजार रुपये, 25 ग्राम पर 50 हजार रुपये, एक किलो पर पांच लाख रुपये और एक किलो से अधिक मात्रा की सूचना पर 10 लाख रुपये तक की इनाम राशि दी जाएगी। बड़े गिरोह से जुड़ी पुख्ता जानकारी देने वालों को पांच लाख रुपये से अधिक का इनाम दिया जाएगा। नशे से संबंधित किसी भी जानकारी को साझा करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा 112 आपातकालीन नंबर सक्रिय किया गया है।
बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, मुख्य सचिव संजय गुप्ता सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सरकार की यह सख्त कार्रवाई यह संदेश देती है कि हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है और इसमें किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।


