रेणुका गौतम, कुल्लू : आज जब दुनिया बेतरतीब जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियों, मानसिक तनाव और सामाजिक असंतुलन से जुझ रही है, तब भारत की परंपरा और भारतीय ज्ञान की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। यह बात आरोग्य भारती संस्था द्वारा ज़िला मुख्यालय कुल्लू में आयोजित एक कार्यशाला के दौरान कही गई। कार्यशाला में संस्था के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी भी शामिल हुए और वर्तमान समय में स्वस्थ जीवन शैली की आवश्यकता पर बल दिया। इस कार्यक्रम के मुख्यातिथि एनएचपीसी प्रमुख सुधीर कुमार नेगी रहे।

संस्था के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि जिस तरह से आज के समय में अधिकतर लोग मानसिक और शारीरिक रोगों से जूझ रहें है, निश्चित तौर पर यदि स्वस्थ जीवन शैली को अपनाया जाए तो काफी हद तक जीवन को स्वस्थ होकर जिया जा सकता है। यह वर्तमान समय की अस्त- व्यस्त जीवन शैली का ही नतीजा है कि अधिकतर युवा भी मानसिक तनाव, शुगर और मोबाइल एडिक्टशन जैसी समस्याओं से ग्रस्त है।

तो वहीं संस्था के प्रशिक्षण प्रमुख एवं संयोजक संजीवन कुमार ने भी बिगड़ती हुई जीवन शैली पर चिंता जाहिर करते हुए अनुशासित और सही खान पान की बात पर बल दिया। उन्होंने कहा की फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन ही अधिकतर बीमारियों की जड़ है। और अधिकांश रोग दवाइयों के बजाए सही और स्वास्थ्य वर्धक भोजन का सेवन से ही ठीक किए जा सकते है। यही बात जन जन तक पहुंचाने के मकसद से ही आरोग्य भारती संस्था का गठन किया गया है।


