Tuesday, January 19, 2021
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प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन को लेकर एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में किया गया मंथन


शिमला,
प्राकृतिक आपदा एवं व्यापक आपदा प्रबंधन विषय एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग व साइंसेज की ओर से डॉ. आनंद मोहन और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के आचार्य शेखर चतुर्वेदी की अगुवाई में मंगलवार को एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया।वेबिनार में प्राकृतिक आपदाओं से मानव जीवन में पड़ने वाले प्रभावों और उनके निवारण व प्रबंधन बारे विषय विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की और आपदाओं से होने वाले प्रभावों को कम करने के लिए आवश्यक उपायों पर विचार किया गया। एपीजी शिमला विश्वविद्यालय और भारत सरकार के गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस वेबिनार का उद्धघाटन एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. रमेश कुमार चौधरी के द्वारा किया गया। इस दौरान एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के सलाहकार इंजीनियर सुमन विक्रांत, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान की ओर से मुख्य विषय विशेषज्ञ अरुण वर्मा, आचार्य शेखर चतुर्वेदी और एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश कुमार चौधरी ने व्यख्यान देते हुए आपदा प्रबंधन पर विस्तृत प्रकाश डाला। वहीं एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने ऑनलाइन वेबिनार में उपस्थित होकर आपदा प्रबंधन के बारे में विषय विशेषज्ञों से आपदा प्रबंधन के बारे में गहरी जानकारी हासिल की कि आपदाओं से कैसे निपटा जाए। विद्यार्थियों ने विषय विशेषज्ञों से प्रश्न पूछकर आपदाओं से जुड़ी शंकाओं को दूर किया। एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के सलाहकार इंजीनियर सुमन विक्रांत ने पहाड़ी प्रदेशों में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, सूखा, हिमस्खलन, बादल-फटना आदि विषयों पर जानकारी दी और चर्चा कर मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के उपायों पर विचार किया। इंजीनियर सुमन विक्रांत ने हिमाचल प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार आपदाओं से निपटने के लिए कई सारे इंतज़ाम व प्रबंध किए हैं लेकिन लोगों में जागरूकता के अभाव में आपदाएं और मुश्किलों पैदा कर देती हैं। उन्होंने कहा कि लोग आपदाओं के प्रबंधन के बारे में ट्रेनिंग भी लें और दूसरों को भी जागरूक करें ताकि मानव जीवन को बचाया जा सके। वहीं वेबिनार में एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति चौधरी ने अपने व्याख्यान में कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने व उनके प्रबंधन बारे आज स्कूल स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर और सामाजिक स्तर पर आपदा प्रबंधन संबंधी शिक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। कुलपति चौधरी ने कोविड-19 महामारी का हवाला देते हुए कहा कि विद्यार्थी और सामाजिक स्तर पर लोग इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए जागरूक हों, शिक्षित हों और आपदा प्रबंधन के नियमों व सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करें तो आपदाओं को कम किया जा सकता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान में बतौर आचार्य शेखर चतुर्वेदी और ट्रेनर अरुण वर्मा ने आपदा व आपदा से होने वाली मानव हानि और मानवीय विकास में बाधा, संसाधनों की हानि और उनसे उपजी शंकाओं के बारे में विद्यार्थियों को लघु-फ़िल्म द्वारा अवगत करवाया और साथ ही यह भी बताया कि किस तरह किसी भी प्रकार की आपदाओं से निपटा जा सकता है, आपदाओं से होने वाले नुक्सान को कम किया जा सकता है यदि लोग इस दिशा में जागरूक हों और समुदाय स्तर से लेकर आस-पड़ोस के लोग आपदाओं से निपटने के लिए जागरूक हों। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन से संबंधित शिक्षा और मानव-संचार इस दिशा में कारगर साबित हो सकता है। आचार्य शेखर चतुर्वेदी ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान हमेशा विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर आपदाओं से निपटने व आपदा प्रबंधन को लेकर विद्यार्थियों, लोगों, आपदा प्रबंधन से जुड़ी संस्थाओं, सरकारी, गैर-सरकारी संस्थाओं और विश्वविद्यालयों को एक सांझा मंच प्रदान करता है। एपीजी शिमला विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति चौधरी और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान की ओर से आचार्य सुमन चतुर्वेदी ने सभी विषय विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और वेबिनार में शामिल लोगों का आभार जताया।

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