Friday, December 4, 2020
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सूर्या अस्पताल में गर्भवती महिला का सफल ऑपरेशन होने के 2 दिन बाद हुई मौत पर लोगों ने जमकर किया हंगामा

शिमला,धर्मशाला/टीम

परिजनों सहित ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप

अस्पताल परिसर में घुसकर दर्जनों लोगों ने की डॉक्टरों व स्टाफ के साथ मारपीट की कोशिश

पुलिस सुरक्षा में डॉक्टरों को निकाला गया बाहर

नूरपुर क्षेत्र के तहत पड़ते सूर्या अस्पताल राजा का तालाब में एक गर्भवती महिला की मौत के मामले को लेकर दर्जनों लोगों ने अस्पताल परिसर में घुसकर नारेबाजी की तथा स्टाफ व डॉक्टरों के साथ मारपीट करने का भी प्रयास किया तथा अस्पताल के आईसीयू में तोड़फोड़ की भी कोशिश की जिससे अस्पताल में दाखिल अन्य मरीजों को भी खासी परेशानी उठानी पड़ी।अस्पताल प्रबन्धक अनुसार यहां पर अस्पताल परिसर का माहौल तनावपूर्ण देखकर पुलिस को बुलाना पड़ा। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की भी सरेआम धज्जियां उड़ाई गई। जानकारी अनुसार ज्वाली की पंचायत हरनोटा के गांव ज्योर की रमना कुमारी (32 )पत्नी राजकुमार गर्भवती थी जिसे बीमार होने पर परिजन हरनोटा स्थित निजी अस्पताल लेकर गए लेकिन वहां गायनी डॉक्टर छुट्टी पर होने के चलते उसे नाजूक हालत देखकर निजी अस्पताल जसूर भेज दिया लेकिन वहां पर भी उसकी गम्भीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे राजा का तालाब में सूर्या अस्पताल में भेज दिया तथा 7 अगस्त सुबह तड़के परिजन थक हार कर रमना को राजा का तालाब अस्पताल में ले आए तथा वहां पर डॉक्टरों ने उसकी गम्भीर हालत देखकर जांच पश्चात उसे दाखिल कर इमरजैंसी ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन के बाद रमना तथा उसकी बच्ची को डॉक्टरो ने बचा लिया । ऑपरेशन के बाद रमना दो दिन तक स्वस्थ रही तथा उसे सामान्य बार्ड में शिफ्ट कर दिया तथा उसे कोई समस्या नहीं थी लेकिन ऑपरेशन के दो दिन बाद तीसरे दिन 9 अगस्त रात्रि को रमना को अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगी तथा पेट में घुटन होनें लगी जिसके बाद परिजनों ने डॉक्टर को बताया।डॉक्टरों ने तुरन्त उसका इलाज शुरू करने के लिए आईसीयू में शिफ्ट करना चाहा मगर इतने में ही रमना ने दम तोड़ दिया। बहीं रमना की सास का कहना है कि उनकी बहू की मौत अस्पताल की लापरवाही की वजह से हुई है। उन्होंने बताया कि जब उनकी बहु सीरियस हो गई तो उन्होंने वहां पर मौजूद स्टाफ नर्स को बताया लेकिन उन्होंने उनकी उस समय कोई सुनवाई नहीं की तथा अपशब्द कहे। । रमना की मौत के बाद उनके गांव के दर्जनों लोगों ने इकट्ठे होकर अस्पताल परिसर में जाकर खूब हंगामा किया तथा अस्पताल मुर्दाबाद की नारेबाजी की।

क्या कहना है अस्पताल एमडी का-

इस विषय में सूर्या अस्पताल के एमडी नीरज ठाकुर का कहना है कि उनके अस्पताल में दो तीन अस्पतालों में मना कर देने के बाद रमना को लेकर उसके परिजन आए थे उनकी मजबूरी को देखते हुए उन्हें 7 अगस्त को सुबह दाखिल कर लिया गया तथा ऑपरेशन के बाद बच्ची को भी बचा लिया गया। मां और बच्ची दोनों ठीक थी। आप्रेशन के दो दिन बाद रमना को सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था जहां पर 2 दिन के बाद 9 अगस्त रात्रि को उसे कुछ तकलीफ शुरू हुई तथा जब डॉक्टर इलाज करने लगे इससे पहले कि कोई इलाज शुरू किया जाता उसी समय उसकी मौत हो गई जबकि अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कोई लापरवाही नहीं की गई है।आप्रेशन पूरी तरह से सफल रहा है। मां बेटी दोनों को बचा लिया गया। 2 दिन के बाद रमना की मौत होने का मुख्य कारण डॉक्टर अनुसार हार्ट अटैक है।लेकिन विना वजह अस्पताल में आकर नारेवाजी करना,स्टाफ के साथ मारपीट का प्रयास,तोड़ फोड़ ,मरीजो को परेशान करना तथा डॉक्टरो के साथ गाली ग्लोज करना बहुत गलत है जिसमें कुछ शरारती तत्व भी शामिल है जो अस्पताल को बदनाम करना चाहते है।

क्या कहते है सर्जन डॉक्टर—

इस बारे में अस्पताल के सर्जन भारतीय नौसेना से रिटायर्ड कमाडरं डॉ विकिंग भानू का कहना है कि मरीज का ऑपरेशन शुरू करने से पहले जांच की गई तो उसकी बच्चेदानी से सारा पानी सूख चुका था बच्चे को जल्द बाहर निकालना जरूरी था अन्यथा मां को भी खतरा पैदा हो सकता था। उस समय ऐसा लग रहा था बच्चा नहीं वच सकता लेकिन ऑपरेशन करने के बाद मां तथा बच्ची दोनों को बचा लिया गया। ऑपरेशन कामयाब रहा मरीज को आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया वहां पर मरीज 3 दिन ठीक रही उसे कोई समस्या नहीं थी लेकिन तीसरे दिन देर रात को मरीज को सांस लेने में दिक्कत हुई तथा पेट में घुटन हुई जिसके तुरंत बाद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर जब वहां पहुंचे उन्होंने देखा कि मरीज के शरीर पर बहुत ज्यादा पसीना आ गया है उसकी हालत बिगड़ रही है जिस पर उसे आईसीयू में शिफ्ट करने ही लगे थे इतने में उसने दम तोड़ दिया। मरीज की सांइल्ट हृदयाघात से मौत हुई है।

क्या कहना है जिलाधीश कांगड़ा का-

इस विषय में जिलाधीश कांगड़ा राकेश प्रजापति का कहना है कि अस्पताल परिसर में यदि सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन हुआ है तथा डॉक्टरों के साथ मारपीट, शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश की गई है तो इस विषय में स्थानीय पुलिस को जांच के आदेश दिए जाएंगे।

क्या कहना है एसपी कांगड़ा का-

इस विषय में एसपी कांगड़ा विमुक्त रंजन का कहना है कि मामला उनके ध्यान में आया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तथा सरकारी डॉक्टरों के पैनल की पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकता है तथा जहां तक अस्पताल परिसर में घुसकर डॉक्टरों के साथ मारपीट करने, अस्पताल परिसर की शांति भंग करने का जो प्रयास किया गया है उस विषय में अभी तक एकदम कुछ भी नहीं कहा जा सकता है लेकिन मामले की सारी रिपोर्ट आने के बाद पूरी जांच अमल में लाई जाएगी।

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