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राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी संघ की हुंकार, प्रदेश सरकार से ओपीएस बहाली की मांग

 

 कहा वरना 2 सितंबर को होगा विधानसभा घेराव

 रेणुका गौतम, कुल्लू : अपनी मांगों को लेकर आज ज़िला मुख्यालय कुल्लू में स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड एम्प्लाइज यूनियन यानि राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी संघ का अधिवेशन रखा गया। जिसमें राज्य के विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों के हकों को लेकर चर्चा की गई। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया यदि समय रहते प्रदेश सरकार द्वारा बोर्ड के कर्मचारियों की मांग को पूरा नहीं किया गया तो आने वाले 2 सितंबर को संघ द्वारा विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

 कुल्लू में आयोजित राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी संघ के अधिवेशन में बोर्ड के सदस्यों में प्रदेश सरकार के प्रति काफी रोष देखने को मिला। अधिवेशन में जहां यूनियन के सदस्यों के हितों पर चर्चा की गई, वहीं प्रदेश सरकार द्वारा इनके हितों को दरकिनार करने की भी बात उठी।

 

 मीडिया से मुखातिब होते हुए यूनियन के प्रेसिडेंट नीतीश भारद्वाज ने कहा कि इस तरह के अधिवेशन यूनियन द्वारा प्रदेश भर के विभिन्न भागों में 5 अगस्त से किए जो रहें हैं। भारद्वाज उपाध्यक्ष काजा की बहुत हैरानीजनक बात है कि प्रदेश में ओपीएस को लेकर सभी सरकारी कर्मचारियों ने अपनी आवाज उठाई और उनकी मुहिम रंग भी लाई जब सरकार की तरफ से इनकी मांगों को स्वीकार कर लिया गया। हालांकि इसी मुहिम में बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने भी शिद्दत सी भाग लिया लेकिन उन्हे ओपीएस बहली का सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला। 

 नीतीश भारद्वाज का कहना है कि बोर्ड द्वारा अपनी कुछ मांगों जिनमें ओपीएस बहाली प्रमुख है कई बार सरकार के ध्यानार्थ लाया गया। गत वर्ष अक्टूबर माह में राजधानी शिमला में बोर्ड के राज्य स्तरीय अधिवेशन में स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा ओपीएस बहाली का आश्वासन दिया गया लेकिन बावजूद इसके अब तक उस दिशा में सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। यही वजह है कि यूनियन द्वारा मजबूरन आने वाले 2 सितंबर को विधानसभा का घेराव करने के फैसला लिया गया है। हालांकि यूनियन हमेशा ही उस हक में रहे है कि यह मुद्दा शांतिपूर्ण तरीके हल हो जाए तो बेतार होगा।

 तो वहीं स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड एम्प्लाइज यूनियन का यह भी कहना है कि ओपीएस बहाली की अनदेखी सहित प्रदेश सरकार द्वारा स्मार्ट मीटर लगाने के फैसले जैसे विभिन्न कदम भी सरकार की बेरुखी साबित करने के लिए काफी है। क्योंकि स्मार्ट मीटर निःसंदेह जनता की जेब पर भारी पड़ने वालें है जिसका सीधा विरोध बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को ही झेलना पड़ेगा। अतः इस सभी बातों को सरकार से मनवाने के इरादे से यूनियन को विधानसभा घेराव का फैसला लेना पड़ रहा है।

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