Sunday, March 1, 2026
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आत्मनिर्भर हिमाचल का नारा खोखला, कांग्रेस सरकार ने विकास पर लगाया पूर्ण विराम : राकेश जमवाल

कहा,,विधायक क्षेत्र विकास निधि पर ताला — मुख्यमंत्री विकास विरोधी राजनीति पर उतरे

मंडी : 2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल का सपना दिखाने वाली सरकार ने वास्तव में प्रदेश के विकास पर पूर्ण विराम लगा दिया है।भाजपा मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विधायक प्राथमिकताओं को केवल एक नई योजना तक सीमित करना यह साबित करता है कि सरकार आर्थिक कुप्रबंधन को छिपाने के लिए विकास कार्यों पर कैंची चला रही है। यह निर्णय न केवल जनप्रतिनिधियों की शक्तियों को सीमित करता है, बल्कि प्रदेश के संतुलित और समग्र विकास को भी गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।

जमवाल ने कहा कि प्राथमिकता बैठक का आयोजन मात्र आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है। सरकार दिखावे के लिए बैठकें करती है, जबकि वास्तविकता यह है कि विधायकों के हाथ बांध दिए गए हैं। पहले जहां सड़क और पेयजल, सिंचाई,सीवरेज जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में दो-दो नई स्कीमें प्राथमिकता में शामिल की जाती थीं, वहीं अब केवल एक योजना तक सीमित कर देना विकास विरोधी सोच का परिचायक है। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार प्रदेश को आगे बढ़ाने के बजाय ठहराव की स्थिति में ले जाना चाहती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ही विधायक क्षेत्र विकास निधि की किश्तें समय पर जारी नहीं की जा रही हैं। जहां विधायकों को विकास के लिए चार किश्ते वर्ष में स्वीकृत होती थी वहीं अब दो किश्ते दे कर विधायक निधि बंद कर दी है।कई क्षेत्रों में स्वीकृत कार्य केवल इसलिए अटके पड़े हैं क्योंकि सरकार के पास धनराशि जारी करने की क्षमता या इच्छाशक्ति नहीं है। अब नई योजनाओं पर रोक लगाकर सरकार ने यह संदेश दे दिया है कि वह न तो स्वयं विकास करना चाहती है और न ही विधायकों को अपने क्षेत्रों में कार्य करने देना चाहती है। यह जनादेश का अपमान है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

भाजपा मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार की नीतियां भेदभावपूर्ण हैं। कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर अन्य क्षेत्रों को उपेक्षित किया जा रहा है। इससे प्रदेश में क्षेत्रीय असंतुलन और बढ़ेगा। विकास कार्यों में इस प्रकार की कटौती से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों को सबसे अधिक नुकसान होगा, जहां पहले से ही आधारभूत सुविधाओं की कमी है। सड़क, पुल, पेयजल और सिंचाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को सीमित करना सीधे-सीधे जनता के अधिकारों पर प्रहार है।
जमवाल ने 2023 की भीषण आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस आपदा में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों और पुलियों को आज तक पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सका है। अनेक स्थानों पर सड़कें बहाल होने के दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कई मार्गों पर बस सेवाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आज भी आवागमन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। सरकार आपदा से हुए नुकसान की भरपाई तक नहीं कर पाई और अब नई योजनाओं पर प्रतिबंध लगाकर प्रदेश को विकासहीनता की ओर धकेल रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बड़े-बड़े मंचों से आत्मनिर्भर हिमाचल की बात करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश आर्थिक संकट से जूझ रहा है और विकास कार्य ठप पड़े हैं। आत्मनिर्भरता का अर्थ होता है आधारभूत ढांचे को मजबूत करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना। परंतु वर्तमान सरकार ने तो विकास की गति को ही रोक दिया है। यह स्पष्ट रूप से विकास विरोधी कांग्रेस की सोच को दर्शाता है।
राकेश जमवाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने विधायक अधिकारों में कटौती और क्षेत्रीय विकास में भेदभाव की नीति को वापस नहीं लिया, तो भाजपा सड़क से सदन तक इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी। प्रदेश की जनता अब समझ चुकी है कि कांग्रेस सरकार के वादे केवल घोषणाएं हैं, जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हो रहा। भाजपा जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और विकास विरोधी नीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष करेगी।

मुख्य प्रवक्ता भाजपा राकेश जमवाल

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