Tuesday, February 24, 2026
Homeshimlaप्रकृति और इंजीनियरिंग का अनूठा संगम, शिमला का वॉटर कैचमेंट एरिया

प्रकृति और इंजीनियरिंग का अनूठा संगम, शिमला का वॉटर कैचमेंट एरिया


शिमला : अगर आप शिमला की रिज और मॉल रोड की भीड़-भाड़ से हटकर प्रकृति की गोद में सुकून तलाशना चाहते हैं, तो शहर से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित वाटर कैचमेंट एरिया आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। यह स्थान न केवल प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अंग्रेजों के जमाने की अद्भुत इंजीनियरिंग का जीवंत उदाहरण भी है।
ढली के पास से शुरू होने वाला यह कैचमेंट एरिया लगभग 10 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। घने देवदार और ओक के जंगलों से घिरा यह क्षेत्र एशिया के सबसे घने जंगलों में गिना जाता है। कुफरी मार्ग पर हसन वैली सेल्फी प्वाइंट से जो घना जंगल दिखाई देता है, वही इस कैचमेंट एरिया का हिस्सा है। यहां प्रवेश करते ही आपको शांति, स्वच्छ हवा और प्रकृति का अद्भुत संगम महसूस होता है।

125 साल पुराना ग्रैविटी वॉटर सिस्टम
इस क्षेत्र की सबसे खास बात है 125 साल पुराना सियोग वॉटर टैंक, जिसे 1901 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान कमीशन किया गया था। इसे ‘ग्रैविटी वॉटर सप्लाई सियोग’ के नाम से जाना जाता है। फारेस्ट गार्ड विकास नेगी ने बताया कि इस टैंक की सबसे अनोखी बात यह है कि इसमें पानी पहुंचाने या शहर तक सप्लाई करने के लिए किसी भी प्रकार की मोटर या पंप का इस्तेमाल नहीं होता। गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) के जरिए ही पानी प्राकृतिक स्रोतों से टैंक तक पहुंचता है और फिर शिमला शहर को आपूर्ति की जाती है।
करीब 18 प्राकृतिक चश्मों में से नौ को इस टैंक से जोड़ा गया है। वर्तमान में यहां लगभग 1 करोड़ लीटर पानी संग्रहित किया जा रहा है। यह टैंक बिना छत का है और इस पर कोई जाली भी नहीं लगी है, फिर भी इसकी स्वच्छता बनाए रखने के लिए यहां पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित है। यह हिमाचल का इकलौता ऐसा खुला टैंक है, जो पूरी तरह ग्रैविटी सिस्टम पर आधारित है।

पाइप के ऊपर बनी सड़क
यहां का 7 किलोमीटर लंबा ट्रैक अपने आप में अनूठा है। जिस सड़क पर पर्यटक पैदल, साइकिल या इलेक्ट्रिक गोल्फ कार्ट से सफर करते हैं, वह वास्तव में पानी की मुख्य पाइपलाइन के ऊपर बनाई गई है। ब्रिटिश काल में यही पाइपलाइन एडवांस स्टडीज तक जाती थी और आज भी शहर को पानी की आपूर्ति कर रही है। ट्रैक के दौरान जगह-जगह व्यू पॉइंट और दो वॉच टावर बनाए गए हैं, जहां से हसन वैली और आसपास के जंगलों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।

जैव विविधता का खजाना
यह क्षेत्र 2013 में वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी घोषित किया गया था। यहां 166 देशी पौधों की प्रजातियां, 21 प्रकार के स्थलीय फूल, 146 पक्षी प्रजातियां और 54 प्रकार की तितलियां पाई जाती हैं। यही कारण है कि यहां सख्त नियम लागू हैं—खाद्य सामग्री ले जाना, कूड़ा फैलाना और शोर करना पूरी तरह प्रतिबंधित है, ताकि वन्य जीवन प्रभावित न हो। यहाँ के आरओ रुपिंदर शर्मा ने बताया कि कैचमेंट एरिया में आगे बढ़ते ही ब्रिटिश काल में बना सियोग रेस्ट हाउस दिखाई देता है। यह लकड़ी से बना ऐतिहासिक ढांचा आज भी उसी स्वरूप में संरक्षित है। यहां देश के गणमान्य लोग और यहां तक कि राष्ट्रपति Droupadi Murmu भी प्रकृति की शांति का आनंद लेने पहुंच चुकी हैं। हालांकि यहां रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं है और केवल दिन के समय ही प्रवेश मिलता है।
ब्रिटिश काल में यहां स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता था। उस समय अधिकारी जब यहां आते थे तो उनके साथ कर्मचारी थूकने और शौच के लिए विशेष डिब्बे लेकर चलते थे। आज भी यहां ट्रैक पर थूकना या टॉयलेट करना सख्त मना है। केवल निर्धारित स्थान पर ही सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध हैं।

पर्यटन और अनुभव
कैचमेंट एरिया में प्रवेश के लिए शुल्क निर्धारित है—प्रति व्यक्ति 150 रुपये, छात्रों के लिए 100 रुपये (आईकार्ड सहित), विदेशियों के लिए 300 रुपये। साइकिल किराया 236 रुपये से शुरू होता है और इलेक्ट्रिक कार्ट का शुल्क 500 रुपये प्रति व्यक्ति है।
यहां का शांत वातावरण, स्वच्छ हवा, पक्षियों की चहचहाहट और 125 साल पुरानी इंजीनियरिंग की मिसाल—सब मिलकर इस जगह को शिमला का एक अनमोल पर्यटन स्थल बनाते हैं।
अगर अगली बार आप शिमला आएं, तो प्रकृति और इतिहास के इस अद्भुत संगम—सियोग वाटर कैचमेंट एरिया—की सैर जरूर करें। यहां आपको सुकून, रोमांच और सीख—तीनों एक साथ मिलेंगे।

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