Friday, April 16, 2021
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मंत्री जी कृपया ध्यान दें ..करसोग अस्पताल में सर्जन तो हैं ‘लेकिन सर्जरी की सुविधा नहीं

एनेस्थीसिया विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से नहीं हो पा रही सर्जरी

स्वास्थ्य महकमे ने अस्पताल में तैनात कर रखे हैं 2 सर्जन

करसोग : जिला मंडी के करसोग उपमंडल स्थित नागरिक चिकित्सालय में सर्जन तो हैं, लेकिन यहां इलाज करवाने पहुंच रहे मरीजों को सर्जरी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। मजबूरन मरीजों को सर्जरी के लिए शिमला या फिर मंडी स्थित सरकारी पड़ रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य महकमा विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती करने के लिए जिस तरह के मापदंड अपना रहा है, उससे साफ जाहिर है कि जनता को इससे कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है। इसका उदाहरण करसोग अस्पताल में साफ तौर पर देखा जा सकता है। यहां स्वास्थ्य महकमा एनेस्थीसिया विशेषज्ञ चिकित्सक का पद नहीं भर पाया, जिसके चलते यहां पर तैनात सर्जन मरीजों की सर्जरी नहीं कर पा रहे हैं। खास बात यह भी है कि करसोग अस्पताल में स्वास्थ्य महकमे ने एक नहीं, बल्कि 2 सर्जन तैनात कर रखे हैं। ऐसे में दोनों ही सर्जन मरीजों की सर्जरी नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि माइनर सर्जरी तो यहां हो जाती है, लेकिन मेजर सर्जरी वाले मरीजों को मजबूरन रेफर करना ही एकमात्र विकल्प रह जाता है स्थानीय लोगों की मानें तो इन दोनों सर्जनों की सेवाओं का लाभ जनता की नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

इन दोनों ही सर्जनों को यदि मरीजों की सर्जरी करनी पड़े तो उसके लिए अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ चिकित्सक का होना भी लाजिमी है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती न होने के चलते ही दोनों सर्जन मरीज की सर्जरी कर पाने में सक्षमन हीं हैं। नतीजतन करसोग अस्पताल से सर्जरी करवाने वाले मरीजों की जान बचाने के लिए उन्हें शिमला रैफर किया जाता है।

सरकार ने करसोग की जनता को सहूलियत देने के लिए तकरीबन 6 करोड़ की लागत से भव्य अस्पताल बना रखा है. लेकिन यह अस्पताल मरीजों को पूर्ण सविधाएं देने में नाकाम साबित हो रहा है। इसी अस्पताल में मरीजों की सुविधा को देखते हुए सर्जरी के लिए ऑप्रेशन थिएटर भी है, लेकिन एनैस्थीसिया विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी के चलते सभी सुविधाएं धरी की धरी ही रह गई हैं।व निजी अस्पतालों का रुख करना और कई बार तो रैफर होने के बाद रास्ते में ही मरीजों की सांस उखड़ जाती हैं

करसोग में नागरिक चिकित्सालय होने के बावजूद महीने में सैकड़ों मरीजों को उपचार के लिए इस अस्पताल से शिमला या फिर मंडी रेफर किया जाता है। इससे न केवल मरीजों, बल्कि तीमारदारों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मरीजों के अस्पताल से रैफर होने के बाद कई मर्तबा मरीज शिमला या मंडी स्थित अस्पतालों में पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।

करसोग से मंडी व शिमला दोनों ही तकरीबन 100 किलोमीटर दूर हैं तथा इस दूरी को वाहनों के जरिए तय करने में तकरीबन 3 से 4 घंटे लगते हैं। चिकित्सकों के अभाव में न जाने कितने ही मरीजों की सांसे इस दूरी को तय करने से पहले ही उखड़ चुकी हैं।

एनेस्थीसिया विशेषज्ञ चिकित्सक ने नहीं किया ज्वाइन : बी.एम.ओ.

कार्यकारी खंड स्वास्थ्य अधिकारी डा. कंवर सिंह में बताया कि विभाग ने गत वर्ष करसोग अस्पताल के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के आदेश किए थे, जिसके चलते 2 सर्जनों ने तो ज्वाइन कर लिया था, लेकिन एनैस्थीसिया विशेषज्ञ चिकित्सक ने ज्वाइन नहीं किया था। एनैस्थीसिया विशेषज्ञ चिकित्सक के बिना यहां तैनात दोनों ही सर्जन मरीजों की मेजर सर्जरी नहीं कर पा रहे हैं। इसकी जानकारी विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि करसोग अस्पताल में मौजूदा समय में 3 विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें रेडियोलॉजिस्ट के अलावा 2 सर्जन शामिल हैं।

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