Thursday, February 27, 2020

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हिमाचल में उगने वाली दुनिया की सबसे महंगी सब्जी पर चीन की सेंध

रमा ठाकुर
प्रकृति के सौंदर्य से लबरेज पहाड़ी राज्य हिमाचल को जड़ी-बूटियों का खजाना माना जाता है। इसी भूमि पर दुनिया की सबसे महंगी सब्जी ‘‘गुच्छी’’ भी उगती है। गुच्छी का वैज्ञानिक नाम मार्कुला एस्क्यूपलेंटा है और हिन्दी में इसे स्पंज मशरूम कहा जाता है।

हिमाचल में इसके दाम 10 से 15 हजार रुपए प्रतिकिलो के करीब हैं जबकि दिल्ली में गुच्छी प्रतिकिलो 40 हजार से अधिक दामों में खरीदी जाती हैं। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे महंगी सब्जी कहा जाता है। भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरीका, यूरोप, फ्रांस, इटली और स्विजरलैंड जैसे देशों में भी गुच्छी की काफी डिमांड है।

हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तराखंड और कश्मीर में भी गुच्छी को दूसरे देशों को निर्यात होता है। अब विडंबना यह है कि भारतीय व्यापार में अड़ंगा डालने वाले चीन ने इस सब्जी पर भी सेंधमारी की है! आलम यह है कि चाइना में कृत्रिम माहौल एवं ग्रीन हाउस में गुच्छी पैदा की जा रही है। ग्रीनहाउस के अंदर पैदा होने के कारण यह फ्रैश नजर आती है। इसी का फायदा उठाकर चीन के व्यापारी इसे सस्ते दामों पर बेच रहे हैं। अलबत्ता, भारतीय व्यापार में काफी असर पड़ा है। हिमाचल की राजधानी शिमला में गुच्छी का व्यापार करने वाले मनु सूद का कहना है कि चीन द्वारा किए गए शोध एवं गुच्छी को तैयार किए जाने के बाद उनके व्यापार में काफी गिरावट आई है। उनका कहना है कि केंद्र व राज्य सरकार को गुच्छी के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए चीन से एक कदम आगे बढ़ाना होगा। बहरहाल, चीन में गुच्छी को खाद इत्यादि से तैयार किया जाता है और हिमाचल में यह सब्जी प्रकृति की देन है। अब सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कौन सी माटी की सब्जी अधिक पौष्टिक होगी।

गुणों और क्वालिटी में फर्क
भारतीय बाजार में बिकने वाली गुच्छी क्वालिटी के मामले में विदेशी माल से कमतर है क्योंकि चाइनीज गुच्छी अच्छे माहौल में पैदा होने की वजह से ज्यादा अच्छी दिखती है l गुणों की बात की जाए तो अपने औषधीय गुणों के कारण भारतीय गुच्छी अपना वर्चस्व बनाए हुए है।

दिल की बीमारी से बचाती है गुच्छी
ऐसा माना जाता है कि गुच्छी की सब्जी औषधीय गुणों से भरपूर है और इसका नियमित सेवन करने से दिल की बीमारियां नहीं होती हैं। यहां तक कि जो हार्ट पेशैंट हैं, उन्हें भी इसके उपयोग से लाभ मिलता है। गुच्छी में विटामिन ‘बी’, ‘डी’ के अलावा ‘सी’ और ‘के’ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इस गुच्छी को बनाने की विधि में ड्राय फ्रूट, सब्जियां और घी इस्तेमाल किया जाता है। गुच्छी की सब्जी बेहद लजीज पकवानों में गिनी जाती है। यही नहीं गुच्छी अपने निकोटिन फलेवर और ओर्गानिक गुणों के कारण भी महत्वपूर्ण हैं। शारीरिक अक्षम, पैरालिसेस के मरीजों आदि के लिए इसके सूप को पीने के लिए कहा जाता है।

पर्वतीय इलाकों में उगती है गुच्छी
विशेष है कि गुच्छी हिमाचल, कश्मीर और हिमालय के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में ही उगती है। बताते हैं कि यह सब्जी पहाड़ों पर बिजली की गड़गड़ाहट के दौरान उगती है। प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगने वाली गुच्छी शिमला जिले के लगभग सभी जंगलों में अप्रैल से जून में होने वाली बारिश के दौरान और बरसात के मौसम में मिलती है। हिमाचल के कुछेक क्षेत्रों में इसे च्याउ भी कहा जाता है। बता दें कि देवदार के जंगलों में इसकी पैदावर अधिक होती है। देवदार के जंगलों में उगने वाली गुच्छी का रंग काला होता है, जबकि चीड़ के जंगलों में उगनी वाली गुच्छी का रंग भूरा होता जिनका भार भी कम होता है।

बेरोजगारों की आजीविका का साधन है गुच्छी
जंगलों में गुच्छी ढूंढने के काम में बढिया मुनाफा मिलने से लोगों को बेसब्री से गुच्छियों के उगने के सीजन का इंतजार रहता है। बेरोजगार युवक-युवतियां गुच्छियां ढूंढकर अच्छी खासी आमदनी कमा लेते हैं। मशरूम प्रजाति की गुच्छी आजकल अमीर घरों की पहली पसंद है। गुच्छी अप्रैल से जून माह के बीच ज्यादा उगती है और ज्यादा समय टिकती भी है । बारिशों के दौरान पैदा होने वाली गुच्छी अधिक समय तक नहीं चल पाती है।इसमें बहुत जल्दी ही फंगस आ जाती है l

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