ऊना में तबाही से टूटी सड़के, पुल बह गए, घर-दुकानों में घुसा पानी, करोड़ों का नुकसान
शिमला– हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नियम 67 के तहत आपदा प्रबंधन पर चल रही चर्चा में भाग लेते हुए ऊना से भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि आज हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोग हिमाचल आने से कतराने लगे हैं। जिस प्रदेश को 12 महीने पर्यटकों की पहली पसंद माना जाता था, वहां अब कोई महीना सुरक्षित नहीं बचा। कभी बादल फटने से जान-माल का नुकसान हो रहा है तो कभी लगातार आपदाएं पर्यटन, बागवानी और खेती-बाड़ी को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं।
सत्ती ने कहा कि इस बार सेब की फसल पर संकट खड़ा हो गया है। सड़कों के टूटने से सब्जियों की सप्लाई बाधित हुई और उनके दाम आसमान छूने लगे। उन्होंने माना कि इस आपदा में प्राकृतिक कारणों के साथ मानवीय लापरवाही भी जिम्मेदार है।
ऊना में 1988 से ज्यादा तबाही
उन्होंने कहा कि ऊना का सौभाग्य रहा कि स्वां नदी का चैनलाइजेशन पहले हो चुका था, वरना तबाही और भी बड़ी होती। इसके बावजूद अगस्त माह में जितना नुकसान ऊना ने झेला, उतना 1988 की आपदा में भी नहीं हुआ था। जिले में बड़े-बड़े पुल बह गए, रामपुर गांव का पुल दो साल से टूटा पड़ा है और बारिश ने वैली पुल की नींव खोखली कर दी है।
घरों में घुसा पानी, करोड़ों का नुकसान
सत्ती ने बताया कि ऊना शहर के कई इलाकों में पानी घरों तक घुस गया, जिससे लोगों के गद्दे, कपड़े और फर्नीचर खराब हो गए। कई परिवारों को पड़ोसियों के घरों में शरण लेनी पड़ी। स्कूलों में 2 से 3 फीट तक पानी भर गया। शहर की बेसमेंट दुकानों में करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। अकेले परिवारों को 3 से 4 लाख रुपये तक का व्यक्तिगत नुकसान झेलना पड़ा।
अवैध खनन और कटान पर चिंता
भाजपा विधायक ने कहा कि ऊना में अवैध खनन ने नदियों को गहरा कर दिया है, जिससे बने हुए पुलों की सुरक्षा खतरे में है। वहीं अवैध कटान भी भविष्य के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जाए और समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से लोगों की जान और संपत्ति को बचाया जा सके।


