कहा वैद्य खेती बनेगी बढ़िया कमाई का ज़रिया
बोले नशे से हटकर सोचने की आवश्यकता
रेणुका गौतम, कुल्लू : “भांग का नाम लेते ही भले ही ज़हन में सबसे पहले नशे का ही ख्याल आता हो, लेकिन असल में यह औषधि है और सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर लोगों के लिए कमाई का बेहतर साधन साबित होगी” , यह बात कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने मणिकर्ण घाटी में कही।

आज ज़िला कुल्लू की मणिकर्ण घाटी के दुर्गम क्षेत्र कटगला -छलाल -रशौल सड़क का भूमिपूजन करने हेतु कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर पहुंचे। यहां भूमिपूजन के पश्चात आम जनमानस को संबोधित करते हुए उन्होंने सबसे पहले सड़क निर्माण कार्य शुरू करने को लेकर सभी को बधाई दी और कार्य शीघ्र पूरा करने का भी आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने क्षेत्र के चहुमुखी विकास हेतु हर संभव कदम उठाने की भी बात कही।

इस मौके पर मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने पुनः प्रदेश में भांग की खेती की वैधता को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भांग को लेकर नशे से हटकर सोचने की आवश्यकता है। क्योंकि असल में यह एक बहुत उपयोगी औषधि है, जिसका इस्तेमाल प्राणघातक बीमारियों से मुक्त हेतु औषधि निर्माण में वरदान साबित हो सकता है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा भांग की खेती की वैधता के लिए नीति तैयार कर ली गई है और संभवतः शीघ्र है यह नीति लागू भी होगी। विधायक ने स्पष्ट करते हुए कहा कि इस नीति निर्माण का मकसद भांग का सही और कमाई हेतु खेती करना है। भांग का इस्तेमाल टैक्सटाइल इस्तेमाल, हथकरघा उत्पाद और औषधि निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किया जा सकता है। खास बात यह है कि इसके लिए विशेष बीज सरकार द्वारा तैयार किया जाएगा जो सिर्फ संबंधित सरकारी विभागों से ही प्राप्त किया जा सकेगा। इससे भांग की खेती करने वालों को भी बहुत बढ़िया फायदा मिल पाएगा।

सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि भांग की खेती की वैद्यता को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। नशे के लिए भांग के इस्तेमाल की वह और उनकी सरकार हमेशा निंदा करते है। लेकिन इसके सही इस्तेमाल की संभावनाओं को मात्र नशे की धारणा को दिमाग में रखते हुए दरकिनार नहीं किया जा सकता। यदि इसकी वैध खेती के माध्यम से लोगों को आर्थिक तौर पर लाभ होगा तो भला कोई अवैध तरीके से नशे हेतु इसकी खेती करने का रिस्क क्यों लेना चाहेगा।

उन्होंने भांग की खेती की वैधता हेतु तैयार नीति को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि इस मकसद को मद्देनजर रखते हुए दो प्रकार की भांग – पहली औद्योगिक भांग तो दूसरी विशेष रूप से औषधि निर्माण हेतु तैयार भांग का प्रावधान है। औद्योगिक भांग की खेती हेतु एक बीघा जमीन हेतु ₹500/ जबकि औषधि वाली भांग की खेती हेतु ₹5 लाख प्रति एकड़, यानी 1लाख प्रति बीघा की लाइसेंस फीस अदा करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी दवा निर्माता कंपनियां भांग से औषधि निर्माण के लिए आमंत्रित है, क्योंकि कुल्लू ज़िला की ओर से भांग के सकारात्मक इस्तेमाल की पहल की गई है तो ऐसे में विशेष तौर से कुल्लू ज़िला में भी भांग के वैध इस्तेमाल से निर्माण हेतु कंपनियां स्थापित होना सही रहेगा।

