Saturday, July 13, 2024
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राज्यपाल ने बसंतपुर में प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों के खेतों का किया निरीक्षण

शिमला : प्रदेश के 7 जिलों और बाहरी राज्यों से आए किसानों ने परखी प्राकृतिक खेती किसानों की आय को दोगुना करने और जहरमुक्त खाद्यान मुहैया करवाने के लिए प्रदेश में शुरू की गई सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती का निरीक्षण करने के लिए महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शुक्रवार को बसंतपुर ब्लाॅक के बमोत और टभोग गांव का दौरा किया। इस दौरान सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के जनक पद्मश्री सुभाष पालेकर भी राज्यपाल के साथ खेतों में किसानों के बीच मौजूद रहे। राज्यपाल ने निरीक्षण के दौरान किसानों से खेती से संबधित जानकारी ली। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती बड़ी तेजी से बढ़ रही है और आज उन्हें खुशी हो रही है कि किसान इस खेती विधि को पूरी तरह खेतों मे अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस खेती विधि के तहत 2022 तक पूरे प्रदेश को लाने का लक्ष्य रखा हुआ है और इसे पूरा करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी पूरी तन्मयता के साथ काम कर रहे हैं।बजट में प्राकृतिक खेती को देश में लागू करने पर दी बधाई राज्यपाल ने केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए बजट में प्राकृतिक खेती विधि
को पूरे देश में लागू करने की घोषणा होने के बाद पूरे प्रदेश वासियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि जिस माॅडल पर हिमाचल प्रदेश चल रहा है उसे अब पूरे देश में अपनाया जाएगा यह बड़े ही गर्व की बात है। वहीं प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के कार्यकारी निदेशक डाॅ आरएस चंदेल ने कहा कि कंेद्रीय बजट में इस खेती विधि को पूरे देश में लागू करने की घोषणा होने के साथ प्रदेश में भी इस ख्ेाती विधि के प्रसार में गति मिलेगी और हिमाचल प्रदेश पूरे देश के लिए एक मिशाल पेश करने जा रहा है।
7 जिलों और बाहरी राज्यों के 26 किसान भी भ्रमण दौरे पर
बसंतपुर ब्लाॅक के दौरे पर आए पद्मश्री सुभाष पालेकर के साथ अनुभव सांझा करने के लिए प्रदेश के 7 जिलों से 200 और बाहरी राज्यों उतराखंड, दिल्ली और महाराष्ट् से 25 किसान आए हुए हैं। इन किसानों ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक
में जानकारी ली। सुभाष पालेकर ने किसानों की फसलों को बंदरों और जंगली जानवरों से बचाने के लिए सरकार की ओर से फेंसिंग के लिए शत् प्रतिशत सब्सिडी देने की मांग की है। इस मौके पर किसान सुरेश ठाकुर ने बताया कि वे पिछले दो सालों से इस खेती को कर रहे हैं और उन्हें पहले ही वर्ष से इसके बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इसके अलावा टभोग के किसान नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि वे पिछले 18 वर्षाें से रासायनिक खेती कर रहे थे और इस दौरान उन्हें स्वास्थ्य से सबंधित कई बिमारियां हो रही थी। लेकिन पिछले एक वर्ष से जब से वे सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं तब से स्वास्थ्य ठीक रहने के साथ उनकी कृषि लागत भी शून्य के बराबर हो गई है।

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