Friday, January 23, 2026
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हिमाचल में चिट्टा कारोबारियों पर सख्ती,नशा तस्करों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने की तैयारी, संपत्तियों पर चलेगा बुलडोजर



शिमला।हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ सुक्खू सरकार ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला लेने की तैयारी कर ली है। चिट्टा व अन्य नशा तस्करी गतिविधियों में शामिल लोग अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने साफ किया है कि इसके लिए जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी और संबंधित कानून में संशोधन किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य जमीनी स्तर की राजनीति को नशा मुक्त बनाना है। मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि इस प्रस्ताव को अगली कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा, ताकि आगामी पंचायत चुनावों में ही इसे लागू किया जा सके।
चिट्टे से अर्जित संपत्तियों पर होगी सख्त कार्रवाई
मंत्री ने दो टूक कहा कि नशे से अर्जित की गई संपत्तियों को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ा जाएगा। पहले ही कुछ संपत्तियों को जब्त किया जा चुका है और आगे भी ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। जरूरत पड़ी तो नशा कारोबारियों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने से भी सरकार पीछे नहीं हटेगी।
सरकारी कर्मचारियों पर भी गिरेगी गाज
अनिरुद्ध सिंह ने यह भी खुलासा किया कि सरकार के पास चिट्टा तस्करी में शामिल सरकारी कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ न केवल कानूनी कार्रवाई होगी, बल्कि उन्हें सेवा से बर्खास्त भी किया जाएगा। कोर्ट में मामलों की सुनवाई अलग प्रक्रिया के तहत चलेगी, लेकिन नौकरी में किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी।
पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां लगभग पूरी
उधर, प्रदेश की मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। आपदा, सीमांकन और पुनर्गठन प्रक्रिया के कारण पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं हो सके। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद अदालत ने चुनाव प्रक्रिया 30 अप्रैल तक पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची, रोस्टर और बैलेट पेपर की छपाई सहित चुनाव से जुड़ी अधिकांश तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। हालांकि, पंचायत चुनाव की अंतिम तारीखों की घोषणा सरकार की औपचारिक मंजूरी के बाद ही की जाएगी।
सरकार के इस फैसले को नशे के खिलाफ निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिससे पंचायत स्तर पर अपराध और नशा तस्करी पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।

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