शिमला, कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर और समाज को इससे बचाव के लिए तैयार करना विषय पर शुक्रवार को एपीजी शिमला विश्वविद्यालय और वेंकटेश्वर ओपन विश्वविद्यालय की ओर से एक दिवसीय नेशनल वेबिनार आयोजित किया गया। वेबिनार में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व प्रमुख व प्रेजिडेंट डॉ. राजन शर्मा और श्री अग्रसैन इंटरनेशनल हॉस्पिटल नई दिल्ली में कार्यरत पीडियाट्रिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विमल विशंभर रैना ने बतौर मुख्यातिथि व विषय विशेषज्ञ शिरकत की। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ पत्रकार व आउटलुक मैगज़ीन के ब्यूरो चीफ डॉ. अश्वनी शर्मा ने किया। वेबिनार में डॉ. अश्वनी शर्मा की ओर से कोरोना की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कोरोना की तीसरी लहर की संभावना, सरकारी की ओर से तैयारियां, रणनीति, वैक्सीनेशन, स्वास्थ्य सुविधाओं, महामारी से सुरक्षा, बच्चों का स्वास्थ्य संबंधित पहलुओं पर इस डॉक्टरी चर्चा को दर्शकों, छात्रों और शिक्षकों के बीच प्रस्तुत करवाते हुए कहा कि अभी तक लोग कोरोना की पहली लहर, दूसरी लहर जो बजुर्गों, वयस्क युवाओं को अपनी चपेट में लिया उस संबंधित जागरूक हैं परंतु वर्तमान स्थिति को देखते हुए लोग कोरोना की संभावित तीसरी लहर के प्रति जागरूक नहीं हैं जो बच्चों के लिए जोख़िम भरी हो सकती है न इस बारे कोई रणनीति, सुरक्षा और कोई ठोस संप्रेषण हैं। डॉ. शर्मा ने बच्चों के सुरक्षित स्वास्थ्य व सेहत और कोरोना की वर्तमान स्तिथि पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय को कार्यक्रम को जन हितैषी व जन जागरूक बनाया। कार्यक्रम में डॉ. राजन शर्मा ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए विशेष रूप से सक्रिय उपाय करने की आवश्यकता है।डॉ. राजन शर्मा ने जोर देकर कहा कि भले ही हम कुछ समय के बाद कोरोना की तीसरी लहर की संभावना करें या न करें लेकिन सभी आवश्यक प्रयास व बुनियादी सुविधाओं का विकास कार्य अभी से प्रारंभ कर देना चाहिए। डॉ. राजन शर्मा ने सरकार को आड़े हाथों लिया कि कोविड-19 महामारी की वर्तमान स्थिति पहली लहर की तुलना में विकराल रूप धारण किए हुए है जिसके लिए सरकारों, प्रशासन को लचर रवैया, स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा, सटीक रणनीति, लापरवाही, बिना सोचे-समझे जन-जमघट की इज़्ज़ाज़त, इलेक्शन रैलियाँ, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, सार्वजनिक कोरोना टीकाकरण, अस्पतालों में बुनियादी आवश्यकताओं का सामान की कमी, विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सेज की कमी, मेडिकल साइंस में रिसर्च की धीमी गति और सरकार का ओवर कॉन्फिडेंस और जनता को सही ढंग से गाइड नहीं किया गया जिसके चलते कोरोना की दूसरी लहर को फैलने के लिए और बल मिल रहा है। डॉ. राजन शर्मा ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि कोरोना की इस जंग में मोटेतौर पर आंकड़ा बताएं तो ग्यारह सौ से भी अधिक डॉक्टरों ने अपनी जान गवाई है जिसका सरकार के पास सही आंकड़ा भी नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते कोरोना-पीड़ितों ने जान गवाई और कई जगहों पर रोगी के तमीरदारों और गुस्साई भीड़ ने अज्ञानतावश डॉक्टरों, नर्सेज पर जान लेवे हमले किए और कई डॉक्टरों को पीट-पीटकर मार डाला। डॉ. राजन शर्मा ने कहा कि यह समय आलोचना करने का नहीं है बल्कि जनता को कोरोना के डर से बाहर निकालने का वक़्त है, जनता को, बच्चों को बचाना है और इसके लिए हमें स्वास्थ्य सुविधाओं और सही सार्वजनिक टीकाकरण को चुस्त-दुरुस्त करना होगा। डॉ. राजन ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार का वो नारा जब तक दवाई नहीं तब तक ढ़िलाई नहीं कहाँ खो गया जबकि खुद सरकार में बैठे लोग और विपक्षी दलों के लोग खुद रैलियों में मशगूल रहे और इन से उपजी भीड़ कोरोना की दूसरी लहर को भी साथ ले आई। उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर का अंदाजा अभी बड़े रिसर्च केंद्रों के वैज्ञानिकों ने लगा लिया और उनके देशों में इस लहर को कंट्रोल करने के लिए रणनीति व स्वास्थ्य सुविधाओं पर अभी से पूरी तैयारी कर ली है जबकि भारत में दूसरी लहर से निपटने के लिए टीकाकरण सभी को उपलब्ध नहीं हो रहा है, कहीं वेंटिलेटर की कमी, कहीं ड्रग्स की कमी, कहीं बैड, गैस सिलेंडर का टोटा तो कहीं डॉक्टरों की कमी से लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि टीकाकरण का बिजनेस-सा हो गया है और अब कई क्षेत्रों में लोगों को टीकाकरण के ढुलमुल को लेकर भी विश्वास उठने लगा है जैसा कि मीडिया में कई जगहों से खबरें आ रही हैं। वहीं वेबिनार में डॉ. विमल विशंभर रैना ने कहा कि कोविड-19 की तीसरी संभावित लहर से निपटने के लिए हमें तीन चरणों की रणनीति अपनानी होगी। इनमें सबसे ऊपर उन्होंने टीकाकरण की दर को बहुत तेज़ गति से बढ़ाने पर जोर दिया। डॉ. विमल ने यह भी कहा कि अगर कोविड के मामलों व दर में गिरावट होती भी है तो भी बुनियादी स्वास्थ्य ढाँचे को और अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं से बढ़ाने की सख्त जरूरत है। डॉ. विमल के अनुसार कोरोना की तीसरी लहर में लक्षणों के नए परिवर्तित रूप की संभावना है जो ब्लैक फंगल, व्हाइट फंगल जैसे परिवर्तित रूप अभी से देखने को मिल रहे हैं। डॉ. विमल ने कहा कि शिशु व बच्चे अभी तक वायरस के संपर्क में नहीं हैं व उन्हें इसका अभी नुकसान नहीं हुआ है, इसलिए नए उत्परिवर्ती म्यूटेंट वाली लहर में बच्चों को प्रभावित करने के लिए खुद को परिवर्तित कर सकता है। डॉ. विमल ने बताया कि अगर इस तीसरी लहर के लिए सब कुछ समान रहता है तब भी हमें एक शिशु या पंद्रह साल के बच्चे को दी जाने वाले टीके व दवा की खुराक को सही मात्रा में देने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी चुनौती होगी और वर्तमान स्थिति को देखते हुए हम आसानी से अपने ज्ञान को बढ़ा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. रमेश चौहान और वेंकटेश्वर ओपन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश कुमार चौधरी ने डॉ. राजन शर्मा, डॉ. विमल विशंभर रैना और डॉ. अश्वनी शर्मा का धन्यवाद करते हुए कहा कि कोरोना महामारी को हल्के में न लेकर इससे बचाब के लिए स्वास्थ्य सुविधा, रणनीति, तेज़ गति से सार्वभौम टीकाकरण, टिकाऊ इलाज़, रिसर्च और जागरूकता अभियान की जरूरत है। कार्यक्रम में एपीजी विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षक और विभिन्न क्षेत्रों से लगभग दो सौ लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ कर कोरोना की तीसरी संभावित लहर बारे डॉक्टरों के विचार सुने। कार्यक्रम के अंत में छात्रों, शिक्षकों और लोगों ने डॉक्टरों से कोरोना से सम्बंधित कई तरह के सवाल पूछकर अपनी शंकाओं को दूर किया।


