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राजशाही मानसिकता छोड़िए मंत्री जी, अब लोकतंत्र है! जनता सवाल पूछेगी और आपको जवाब देना पड़ेगा : प्यार सिंह

शिमला ग्रामीण की जनता ने विधायक बनाया, मंत्री बनाया और आज उसी जनता को आंखें दिखा रहे विक्रमादित्य सिंह

2024 में मंडी ने नकारा, अब शिमला ग्रामीण की जनता के सवालों से क्यों भाग रहे मंत्री जी?

शिमला, 23 अक्टूबर 2026। भाजपा मीडिया सह प्रभारी प्यार सिंह ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मंत्री जी, राजशाही की मानसिकता से बाहर निकलकर लोकतंत्र की मर्यादा समझिए। अब वह दौर नहीं रहा, जब जनता को शासक के सामने सिर झुकाकर खड़ा होना पड़ता था। आज जनता अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछती है और उन्हें जवाब देना पड़ता है। शिमला ग्रामीण की जनता जब तक चुप रहे, तब तक सब ठीक है, लेकिन जैसे ही वह अपने क्षेत्र के विकास और समस्याओं पर सवाल उठाती है, मंत्री जी के अहंकार को ठेस पहुंच जाती है। आखिर यह कैसा लोकतांत्रिक व्यवहार है?

प्यार सिंह ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह को बार-बार याद रखना चाहिए कि शिमला ग्रामीण की जनता ने उन्हें दो बार विधायक चुना और उन्हें मंत्री पद तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विडंबना यह है कि माननीय मंत्री को अपने विधानसभा क्षेत्र की जनसंख्या और मतदाताओं की सही जानकारी भी नहीं है 110000 से ऊपर की जनसंख्या को वह 60000 बता रहे हैं और 76000 से ज्यादा मतदाताओं को वह 30000 मतदाता बता रहे हैं आज जब उसी क्षेत्र की जनता सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं और विकास कार्यों पर सवाल पूछती है, तो उसे संतोषजनक जवाब देने के बजाय मंचों से आंखें दिखाई जाती हैं और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाता है। मंत्री जी, जनता ने आपको अपना प्रतिनिधि बनाया है, अपना शासक नहीं। जनता के सवालों का जवाब देना आपका कर्तव्य है, कोई एहसान नहीं।

उन्होंने कहा कि शिमला ग्रामीण की सड़कों की बदहाली लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विडंबना देखिए कि जिस विभाग की जिम्मेदारी स्वयं विक्रमादित्य सिंह के पास है, उसी विभाग के मंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र की सड़कें दुर्दशा का शिकार हैं। यदि अपने क्षेत्र की सड़कें सुधारने में ही सरकार और विभाग सफल नहीं हो पा रहे, तो प्रदेश की बाकी सड़कों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

प्यार सिंह ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह को बताना चाहिए कि शिमला ग्रामीण की जनता को आखिर विकास के नाम पर क्या मिला? क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों की चिंताएं लगातार सामने आ रही हैं। जनता को यह महसूस होने लगा है कि उनकी समस्याएं सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं। सवाल पूछने पर नाराजगी जताने के बजाय मंत्री को जनता के बीच जाकर उसकी परेशानियां सुननी चाहिए और समाधान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज शिमला ग्रामीण के लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह क्षेत्र विक्रमादित्य सिंह के लिए केवल विधानसभा पहुंचने और मंत्री पद हासिल करने का राजनीतिक रास्ता है? क्या जनता ने उन्हें केवल अपने राजनीतिक कद को बढ़ाने के लिए चुना था? यदि ऐसा नहीं है, तो फिर क्षेत्र के विकास और जनसमस्याओं पर सवाल उठाने वालों के साथ सम्मानजनक व्यवहार क्यों नहीं किया जाता?

वर्ष 2024 में विक्रमादित्य सिंह मंडी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने गए थे, जहां जनता ने उन्हें जनादेश नहीं दिया। प्यार सिंह ने कहा कि मंडी के चुनाव परिणाम से भी उन्हें सीख लेनी चाहिए थी कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। अब शिमला ग्रामीण की जनता अपने क्षेत्र के विकास का हिसाब मांग रही है, तो मंत्री जी को उसकी आवाज सुननी चाहिए। राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अपनी जगह हैं, लेकिन जिस क्षेत्र ने दो बार विधायक बनाया, उसके प्रति जवाबदेही से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।

प्यार सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता का सेवक होता है, शासक नहीं। जनता की आलोचना और सवालों को व्यक्तिगत अपमान समझना अहंकार का परिचायक है। मंत्री पद स्थायी नहीं होता, लेकिन जनता के साथ किया गया व्यवहार और जनप्रतिनिधि के काम का हिसाब हमेशा याद रखा जाता है।

उन्होंने कांग्रेस सरकार और लोक निर्माण मंत्री से मांग की कि शिमला ग्रामीण की बदहाल सड़कों की स्थिति पर स्पष्ट जवाब दिया जाए, लंबित विकास कार्यों की जानकारी सार्वजनिक की जाए और क्षेत्र में प्रभावित बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।

प्यार सिंह ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह राजशाही मानसिकता छोड़ें और लोकतंत्र की मर्यादा में रहकर जनता से संवाद करें। शिमला ग्रामीण की जनता ने आपको सम्मान दिया, विधायक बनाया और मंत्री पद तक पहुंचाया है। अब आपकी जिम्मेदारी है कि आप उस सम्मान का मान रखें। जनता सवाल पूछेगी, विकास का हिसाब मांगेगी और अपने अधिकारों के लिए आवाज भी उठाएगी—उसे आंखें दिखाकर चुप नहीं कराया जा सकता।

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