Saturday, November 29, 2025
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केंद्र सरकार द्वारा 4 श्रम संहिताओं का निर्णय श्रमिक विरोधी, सीटू और किसान सभा का विरोध प्रदर्शन

केंद्र सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप

रेणुका गौतम, कुल्लू : केंद्र सरकार के खिलाफ़ देश भर में विभिन्न मजदूर संगठन और किसान सभा एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन पर उतर आएं है। ज़िला मुख्यालय कुल्लू में भी सीटू और किसान सभा ने मिलकर धरना प्रदर्शन किया और केंद्र पर श्रमिकों एवं किसानों के विरुद्ध जाकर पूंजीपतियों का संरक्षण देने के आरोप भी लगाए। सीटू के ज़िला सचिव राजेश ठाकुर ने कहा कि आज केंद्र सरकार के खिलाफ श्रमिक और किसान इसलिए खड़े हैं क्योंकि सरकार इन वर्गो के हितों की लगातार अनदेखी करते हुए अजीबोगरीब फैसले ले रहे है।

उहोंने कहा कि जहां पहले देश में श्रमिकों हेतु 44 कानून थे लेकिन गत 21 नवंबर को केंद्र द्वारा वह सभी कानून हटाकर मात्र 4 श्रम संहिताएं शीघ्र लागू करने की बात कही गई है। जिसका सीधा फायदा श्रमिकों को न होकर समाज के पूंजीपति और धनी तबके को होगा। साथ ही श्रमिक वर्ग का शोषण भविष्य में और अधिक बढ़ने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।

तो वहीं किसान सभा द्वारा विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर राजेश ठाकुर ने कहा कि कुछ वर्षों पहले किसानों द्वारा अपने हकों के लिए दिल्ली में विशाल विरोध प्रदर्शन किया गया था। जिसमें तकरीबन 750 किसानों ने अपने प्राणों की आहुति भी दी। हालांकि सरकार द्वारा किसान विरोधी कानून वापिस लेते हुए किसानों के हक में आगे बढ़ाने की बात भी कही थी। लेकिन आज तक किसानों के हक में तैयार स्वामीनाथन आयोग की उस रिपोर्ट को धरातल में नहीं उतारा गया है। जिससे किसान वर्ग भी खुद को ठगा हुए महसूस कर रहा है। यही वजह है कि आज सीटू और किसान सभा मिलकर केंद्र सरकार के खिलाफ़ खड़े हुए हैं।

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