Sunday, March 3, 2024
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वन विभाग ने खोज निकाला मेसोजोएक काल का जीवाश्म

 पृथ्वी पर किसी समय जीवित रहने वाले अति प्राचीन सजीवों के परिरक्षित अवशेषों या उनके द्वारा चट्टानों में छोड़ी गई छापों को जो पृथ्वी की सतहों या चट्टानों की परतों में सुरक्षित पाये जाते हैं उन्हें जीवाश्म (जीव + अश्म = पत्थर) कहते हैं।  इनके अध्ययन को जीवाश्म विज्ञान या पैलेन्टोलॉजी कहते हैं।

विभिन्न प्रकार के जीवाश्मों के निरीक्षण से पता चलता है कि पृथ्वी पर अलग-अलग कालों में भिन्न-भिन्न प्रकार के जीव हुए हैं।

ऐसे ही एक जीवाश्म की खोज खड़ापत्थर, जिला शिमला में वन विभाग  ने की है। बीते दिनों 30 अप्रैल को को जब वनमंडल अधिकारी रोहडू चंदू ताशिलदार, जुब्बल वन परिक्षेत्र में देसराज (वन परिक्षेत्र अधिकारी जुब्बल), विकास ठाकुर (वन रक्षक, खड़ापत्थर बीट) और रणधीर (वन रक्षक) के साथ नियमित दौरे पर थे,  तब उन्हें खड़ापत्थर-शीलघाट रास्ते के साथ एक वनस्पति जीवाश्म दिखाई दिया।

जीवाश्म की तस्वीर डा. हरी चौहान, क्यूरेटर हि.प्र. राज्य संग्रहालय शिमला को दिखाई गई। डा. हरी चौहान ने बीते रोज 1 मई को को स्वयं मौके पर आ कर जीवाश्म का निरीक्षण करते हुए पुष्टि की यह जीवाश्म वनस्पति का है।

भूवैज्ञानिक समय पैमाने पर यह जीवाश्म Mesozoic काल (६७-२५० मिलियन साल) से होने का अनुमान लगाया है। इतना ही नहीं,  डा. हरी चौहान ने मौके पर और २-३ जीवाश्म पहचान लिए जो आम आदमी की नज़रों से पहचान में नहीं आते।

आगामी जांच पड़ताल के लिए इस क्षेत्र का संवर्धन किया जाएगा। इस खोज के साथ खड़ापत्थर क्षेत्र एक नई पहल के लिए जाना जाएगा।

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