Friday, May 14, 2021
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पंडित सुखराम की जमानत हो रद्द ..प्रवीण शर्मा

लोकसभा चुनाव 2019 मंडी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी आश्रय शर्मा के प्रचार में उतरे पंडित सुखराम को घेरते हुए भाजपा के प्रदेश मीडिया  प्रभारी प्रवीण कुमार शर्मा ने कहा कि पण्डित सुखराम देश के सर्वोच्च न्यायालय को धोखा देकर कांग्रेस पार्टी का चुनाव प्रचार कर रहे हैं । व और इसके लिए न केवल उनकी जमानत रद्द होनी चाहिए बल्कि देश के सर्वोच्च न्यायालय को गुमराह करने के लिए  भी  एक अलग  मामला  दर्ज होना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि आय से अधिक संपत्ति, भ्रष्टाचार व घूसखोरी के तीन अलग मामलों में से एक मे पांच वर्ष की सजा प्राप्त कर चुके पंडित सुखराम ने  वर्ष 2012  में  अपनी शारीरिक  बीमारियों और बढ़ती उम्र के मद्देनजर देश के सर्वोच्च न्यायलय से जमानत प्राप्त की थी। परन्तु उसके पश्चात अपने बेटे के लिए विधानसभा चुनावों और अब पोते के लिए संसदीय क्षेत्र के विभिन्न  क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करने से यह स्पष्ट हो गया है कि केवल जेल से बचने के लिए ही उस समय  उन्होंने बीमारी का ड्रामा रचा  था। और झूठी मेडिकल रिपोर्टों से सर्वोच्च न्यायालय को गुमराह किया था जबकि  वास्तविकता में वह पूर्ण रूप से तब भी  स्वस्थ थे और अब भी स्वस्थ हैं       प्रवीण शर्मा ने कहा कि न्याययिक प्रक्रिया के दौरान सी बी आई द्वारा  “आदतन अपराधी” की संज्ञा से नवाजे जा चुके पंडित सुखराम अगर कांग्रेस के लिए  तुरंत चुनाव प्रचार बंद नही करते हैं तो वह  व्यक्तिगत रूप से इस सारे मामले को तथ्यों सहित सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान लाएंगे।  पंडित सुखराम  के खिलाफ  क्रिमिनल अपील नंबर 1398/2012,1399/2012 व 1400/2012  के तहत अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में मुकद्दमे चले हुए हैं  झूठे तथ्यों से कोर्ट को गुमराह करके सर्वोच्च न्यायालय को उन्होंने गुमराह करने का काम किया है  ऐसे में उनकी जमानत रद्द होती है तो  इसके लिए कोई और नही वह स्वयं जिम्मेदार होंगे।

भाजपा के मीडिया प्रभारी ने कहा कि पंडित सुखराम ने अपने कृत्यों से हमेशा राजनीति को कलंकित किया है 1953 में मंडी म्युनिसिपल कमेटी के सेक्रेटरी, प्रदेश के मंत्री  व केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान जिस भी मंत्रालय में रहे उनके द्वारा किये गए घोटाले प्रदेश व देश के लिए शर्म का विषय है। प्रदेश में आबकारी व कराधान मंत्री रहते हुए  नियमो को ताक में रखकर की गई  नियुक्तियां, अवैध कटान, सरकारी भूमि का अतिक्रमण व चीनी घोटाला, टेलीकॉम में घूसख़ोरी, आय से अधिक संपत्ति व दूरसंचार उपकरणों की  अवैध खरीद  जैसे कई घोटाले उनके आदतन भृष्टचारी की छवि को ही  पुख्ता करते है। और अब वह अपने ही जाल में उलझकर रह गए हैं।और इससे बचना मुश्किल है।

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