Sunday, April 14, 2024
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वर्तमान समय में भी साहित्य की प्रासंगिकता बरकरार: उपायुक्त तोरूल एस रवीश

3 दिवसीय कुल्लू साहित्य उत्सव का देवसदन में शुभारंभ

रेणुका गौतम, कुल्लू : हिमतरु प्रकाशन समिति तथा भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 3 दिवसीय कुल्लू साहित्य उत्सव का शुभारंभ देवसदन कुल्लू में हुआ। उत्सव की अध्यक्षता उपायुक्त कुल्लू तोरुल एस रवीश द्वारा की गई। हिमतरु प्रकाशन समिति अध्यक्ष किशन श्रीमान ने मुख्य अतिथि व अन्य गणमान्य का स्वागत किया। अपने संबोधन के दौरान उपायुक्त ने वर्तमान समय में भी साहित्य की प्रासंगिकता को लेकर अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि साहित्य की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है जितनी पूर्वकाल में थी, भले ही समय के साथ इसमें बदलाव आते रहें हों। जहां एक ओर साहित्य देश सहित विश्व की हर कड़ी को जोड़ता है तो साथ ही काल व इतिहास को संकलित भी करता है।

साहित्य के महत्व को लेकर बात करते हुए उपायुक्त ने आधुनिक सूचना तकनीक के युग में साहित्य पठन-पाठन के महत्व पर बल दिया तथा बच्चों में बाल्यकाल से ही पाठ्यक्रम पुस्तकों के पढ़ने के साथ अन्य पुस्तकें पढ़ने पर भी बल दिया। साथ ही उन्होंने समाज में साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निरन्तर अध्ययनरत रहना न केवल हमारे बौद्धिक विकास को बढ़ाता है बल्कि हमें समाज के प्रति संवेदनशील भी बनाता है। आधुनिक युग में जब पाठक डिजिटल माध्यम के प्रति अधिक आकृष्ट हो रहें हैं तो ऐसे में भी पुस्तक पाठन लेखन की प्रासंगिकता ओर बढ़ गई है।

जिला मुख्यालय कुल्लू में चल रहे साहित्य उत्सव के दौरान प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉo शेखर पाठक ने पहाड़ की चिंताए व हिमालय विषय पर अपने शोधपूर्वक विचार रखे। तो वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाॅo बजरंग बिहारी तिवारी ने दलित विमर्श पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए उत्सव की शोभा बढ़ाई।

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