Saturday, March 7, 2026
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हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) कर्मचारी संघ की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित


प्रदेशाध्यक्ष हुक्म राम ने की अगुआई
रेणुका गौतम, कुल्लू : हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) कर्मचारी संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आज दिनांक 07 मार्च 2026 को मनाली में आयोजित की गई। जिसमें निगम के विभिन्न इकाइयों से आए पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान कर्मचारियों ने निगम से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की तथा हाल ही में निगम प्रबंधन द्वारा लिए जा रहे निर्णयों पर अपने विचार रखे।
बैठक में विशेष रूप से निगम प्रबंधन द्वारा दिनांक 06 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना, जिसके माध्यम से निगम के कुछ होटलों को ओ एंड एम (Operation & Maintenance) आधार पर देने की प्रक्रिया शुरू की गई है, उस पर गंभीर चर्चा की गई। कर्मचारी संघ ने इस निर्णय का कड़ा विरोध व्यक्त किया है और इसे निगम तथा कर्मचारियों के हितों के विपरीत बताया है।
कर्मचारी संघ का कहना है कि जब निगम के कर्मचारी लगातार मेहनत करके संस्थान को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे समय में निगम की इकाइयों को निजी हाथों में देना उचित नहीं है। वर्ष 1972 में स्थापना के बाद पहली बार निगम की आय ₹100 करोड़ से अधिक हुई है, जो कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण का ही परिणाम है।
यदि प्रदेश के विभिन्न निगमों और बोर्डों की वित्तीय स्थिति पर नजर डाली जाए तो पर्यटन निगम घाटे के मामले में लगभग सातवें स्थान पर आता है और इसका घाटा मात्र लगभग ₹36 करोड़ है। यह घाटा भी मुख्य रूप से कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति देनदारियों के कारण है। इसके अतिरिक्त पिछले समय में प्रदेश को आपदा प्रभावित राज्य घोषित किया गया था, भारी बारिश के कारण सड़कों और आधारभूत ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा था, जिससे पर्यटन गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। साथ ही देश में ऑपरेशन सिंदूर जैसी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण भी पर्यटन क्षेत्र प्रभावित हुआ, जिसका सीधा असर निगम की आय पर पड़ा।
कर्मचारी संघ का कहना है कि यदि सरकार घाटे को ही आधार बनाकर इस प्रकार के निर्णय लेना चाहती है, तो पहले उन अन्य निगमों और बोर्डों की स्थिति पर विचार किया जाना चाहिए, जिन पर हजारों करोड़ रुपये का घाटा है। ऐसे में केवल पर्यटन निगम को ही निशाना बनाना उचित नहीं है।
संघ ने यह भी कहा कि इस विषय को लेकर कर्मचारी संघ का प्रतिनिधिमंडल पूर्व में प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय से भी मिला था, जिसमें मुख्यमंत्री ने यह आश्वासन दिया था कि निगम के होटलों को ओ एंड एम आधार पर निजी हाथों में नहीं दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त निगम के माननीय अध्यक्ष आर.एस. बाली जी द्वारा भी समय-समय पर विभिन्न समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया के माध्यम से यह आश्वासन दिया गया था कि निगम की किसी भी इकाई को निजी हाथों या बिचौलियों के माध्यम से संचालित नहीं किया जाएगा।
कर्मचारी संघ ने यह भी उदाहरण दिया कि पूर्व में जब निगम की कुछ इकाइयों को निजी हाथों में दिया गया था, तो वहां कार्यरत कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति देनदारियों और अन्य वित्तीय दायित्वों का भुगतान अंततः निगम को ही करना पड़ा। उदाहरण के तौर पर वाइल्ड फ्लावर हॉल का मामला सामने है, जहां लगभग 80-100 कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति एवं अन्य देनदारियों का भुगतान निगम को ही करना पड़ा था।
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि कर्मचारी संघ इस निर्णय के विरोध में आगामी विधानसभा सत्र के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करेगा। जो भी कर्मचारी विधानसभा ड्यूटी पर उपस्थित होंगे, वे काले बिल्ले लगाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे और इस निर्णय के प्रति अपना विरोध प्रकट करेंगे।
कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार द्वारा इस प्रक्रिया पर पुनर्विचार नहीं किया जाता है, तो कर्मचारी संघ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेगा। अंत में कर्मचारी संघ ने कहा कि वह निगम की संपत्तियों, कर्मचारियों के अधिकारों और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए पूरी मजबूती के साथ संघर्ष करेगा।

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