Sunday, March 3, 2024
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पवित्र झील के आज होंगे दीदार, चढ़ाए जाएंगे नकदी नोट और आभूषण


कमरुनाग के चपे-चपे पर रहेगी पुलिस की निगरानी
मृगेंद्र पाल

गोहर (मंडी) : कमरुनाग में दो दिन तक चलने वाला मेला सरनाहुली 14 जून से 15 जून तक मनाया जाएगा। मेले को लेकर प्रशासन व मेला कमेटी पूरी तरह से मुस्तैद है। वहीं मेले में आंतरिक सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन पहले से ही तैयार है ताकि वहां कोई भी अप्रिय घटना न घट सके। मेले में सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक रिजर्व टुकड़ी वीरवार को कमरुनाग के लिए रवाना हो चुकी। टुकड़ी में एक एएसआई, चार हेड कांस्टेबल और तीस कांस्टेबल शामिल हैं। इसके अलावा एक दर्जन महिला कांस्टेबल भी रवाना हो चुकी है।

दूसरी और सुंदरनगर के कलौनी थाना व रोहांडा पुलिस चौकी से भी एक टुकड़ी रोहांडा में तैनात रहेगी जो कि यातायात व्यवस्था का जिम्मा संभालेगी। मेला सफल बनाने के लिए पुलिस जवान चपे-चपे पर तैनात रहेंगे।
यह मेला अराध्य देव कमरूनाग जो कि इंद्र देवता के नाम से भी जाने जाते है के मूल स्थान कमराह घाटी पर मनाया जाता है। मेले की विशेषता यह है कि यहां लोग हिमाचल के अलावा अन्य दूसरे राज्य से भी आकर एक या दो दिन पहले ही डेरा जमाए घाटी का खूब लुत्फ उठाते हैं। यहां लोग मेले से पूर्व संध्या को ही एकत्र होने शुरू हो जाते हैं और रात को भजन कीर्तन कर खूब आनंदित हो उठते हैं। हालांकि इससे पूर्व में यहां बिजली व पानी की व्यवस्था नहीं थी मगर आज यहां बिजली व पानी की पूर्ण व्यवस्था है, जिससे लोगों को रात में ठहरने की भी सुविधा मिल पा रही है।

एक समय था जब यहां लोग पैदल मीलों सफर कर पहुंचते थे लेकिन आज यहां का सफर करना आसान हो गया है। देव कमरूनाग के लिए सड़क सुविधा मिल जाने के कारण अब यहां पहुंचने के लिए लगभग एक किलोमीटर का ही पैदल सफर रह गया है। वहीं मेले में खाने पीने के सामान की भी पूर्व में पूर्णतया आपूर्ति नही हो पाती थी, जिस कारण वहां के ढाबे वाले दो गुना व तीन गुना रेट पर आधा पक्का हुआ खाना मुहैया करवा पाते थे जो कि मेले में आए भक्तजनों को मजबूरन खाना पड़ता था। आज यहां की स्थिती पहले से कहीं ज्यादा बेहतर है। यहां कई ऐसे धार्मिक संगठन देव कमरूनाग की आस्था से प्रेरित होकर इस इस भव्य स्थान पर लंगर व भंडारों का आयोजन कर रहे हैं जिससे लोगों को खाने पीने की काफी सुविधा महसूस हो रही है।

वादियों की सुंदरता भुला देती है रास्ते की थकान 
देव कमरूनाग व माता शिकारी देवी में जाते समय राहगीर को जरा भी थकान का आभास नहीं हो पाता क्योंकि यहां की पहाड़ियां जन्नत से कहीं कम नहीं है। राहगीर को ऐसा लगता है कि वे कहीं स्वर्ग में आ गए हों। पर्यटन की दृष्टि से अगर देखा जाएं तो यहां की वादियां मनाली व शिमला से कम नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस समय गर्मी आग उगल रही है लेकिन यहां का तापमान कभी 20 डिग्री से उपर नहीं गया है जिससे लोगों को गर्मी से काफी राहत मिल पाती है और थकान का जरा सा भी आभास नहीं हो पाता। 

कभी देवस्थल से एक किलोमीटर पीछे उतार दिए जाते थे जूते
मान्यता के चलते आज से तीन दशक पहले देवता स्थल पर जाने वाले शरणार्थियों को देवस्थल के पास चमडे़ से निर्मित जूते या बैग ले जाने पर पूर्ण तरह से पाबंदी थी। शरणार्थियों को खुंडा नामक स्थान पर अपने जूते उतारने पड़ते थे। आज जमाना करवट ले चुका है और लोग उस पाबंदी को हटा कर चमड़े से निर्मित सामान को मंदिर परिसर के स्थान पर ले जाने लगे हैं।

दुधिया रोशनी से जगजगा रहा देव परिसर 
मंदिर परिसर में सोर उर्जा की लाइटें देव परिसर को चार चांद लगा रही है। रात के समय दुधिया रोशनी से जगमगाते देव परिसर का नजारा देखते ही बन जाता है। देव परिसर के चारों ओर लाईटों का प्रावधान प्रशासन व देव कमेटी की ओर से किया गया है। रात भर ठहरने वाले श्रद्धालूओं को यहां रास्ते के दौरान हुई थकान का जरा भी एहसास नही होता है। परिसर में रोशनी हो जाने से श्रद्धालू कमरूनाग की पवित्र झील की परिक्रमा कर सकते है। 

बलि प्रथा के अंत से बढ़ रही है देव कमरूनाग की धन संपति 
माननीय उच्च अदालत के आदेशानुसार बलि प्रथा के अंत से देव कमरूनाग की धन संपति में जबरदस्त इजाफा हुआ है। हालांकि कमेटी के कुछ लोग इस विषय के विरोधाभास में है। मन की मुराद पूरी होने पर लोग देव कमरूनाग को बकरों को भेंट के रूप में चढ़ाते थे, जो कि लगभग आज भी बरकरार है। फर्क सिर्फ इतना है कि लोग अब बकरों को काटने के बजाए देवता के नाम पर वहीं छोड़ आते है, जिस पर सिर्फ मेला कमेटी का ही अधिकार होता है। अदालत के इस फैसले से लोग अब नगदी रूप में ही भेंट झील परिसर में छोड़ आते हैं जिससे कमेटी की चढ़ावा संपति दो गुना से तिगुना बढ़ गई है। हालांकि झील परिसर में नगद धन राशि फैंकने पर पांबदी के सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं फिर भी लोग आस्था के नाम पर पांबदी को दरकिनार कर ही डालते हैं।

स्वच्छता का विषेष ध्यान 
इस बार मेले के आयोजन में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया है। मेला कमेटी के प्रधान मान सिंह का कहना है कि मेला परिसर के समीप विभिन्न स्थानों पर अस्थाई शौचालय का निर्माण करवाया गया है ताकि लोग इधर उधर गंदगी न डाल सके। मेले में अनेक स्थानों पर कुड़ादानों की भी व्यवस्था की गई है। हर दुकानदार को भी सूखा व गिला कचरा कुड़ादान में डालने की अपील की गई है। उन्होंने मेले में आने वाले शरणार्थीयों से आग्रह किया कि वे मेले में गंदगी न फैलाएं।

मेले को सफल बनाने के लिए सभी से अपील की गई हैं। अनुशासन बनाये रखने के लिए पुलिस का पहरा मेले में रहेगा। श्रद्धालुओं से भी मेले को सफल बनाने की अपील की गई हैंl

अमित कुमार शर्मा, कार्यकारी दंडाधिकारी गोहर।

किसी घटना को रोकने के लिए पुलिस के जवान कमरुनाग रवाना हो चुके हैं। मेले में।शांति बनाए रखने व यातायात व्यवस्था बहाल करने के लिए पुलिस की भूमिका अहम रहेगी।

मनोज वालिया, थाना प्रभारी गोहर।

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