शादियों में फिजूलखर्ची पर रोक: टौरू गांव बना सामाजिक बदलाव की मिसाल, सालाना एक करोड़ से ज्यादा की होगी बचत
गिरिपार (हिमाचल प्रदेश)।
हिमाचल प्रदेश के गिरिपार क्षेत्र का टौरू गांव सामाजिक सुधार की दिशा में एक नई मिसाल बनकर उभरा है। गांव के लोगों ने आपसी सहमति से शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची और दिखावे पर रोक लगाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस फैसले का उद्देश्य न केवल आर्थिक बचत करना है, बल्कि सामाजिक दबाव से लोगों को मुक्त कर मानसिक राहत भी देना है।
ग्रामीणों के अनुसार पहले गांव में एक शादी पर औसतन 10 से 15 लाख रुपये तक खर्च हो जाता था। यदि साल में 10 शादियां होती थीं, तो कुल खर्च डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच जाता था। महंगे भोज, अनावश्यक तामझाम और सामाजिक दिखावे के कारण कई परिवार कर्ज तक लेने को मजबूर हो जाते थे।
अब नए नियम लागू होने के बाद एक शादी पर अनुमानित खर्च घटकर करीब 5 लाख रुपये रह जाएगा। इससे गांव में हर साल एक करोड़ रुपये से अधिक की सीधी बचत संभव होगी। ग्रामीणों का कहना है कि यह बचत केवल पैसों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लोगों को यह सुकून मिलेगा कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार विवाह समारोह आयोजित कर सकते हैं।
गांववासियों का मानना है कि शादी जैसे पवित्र संस्कार को सादगी, समानता और सम्मान के साथ मनाया जाना चाहिए, न कि सामाजिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनाया जाए। इस पहल से खासतौर पर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि टौरू गांव से पहले शिलाई तहसील के द्राबिल गांव में भी इसी तरह की पहल की गई थी, जहां शादी के भोज को केवल एक दिन तक सीमित किया गया था। अब टौरू गांव का यह फैसला पूरे गिरिपार क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी इस पहल से आसपास के अन्य गांव भी प्रेरणा लेंगे और सामाजिक आयोजनों में सादगी अपनाने की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। यह कदम न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है।


