मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विभागों और उपक्रमों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में राज्य में निर्माणाधीन ऊर्जा परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई और अधिकारियों को समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने गर्मियों के मौसम में प्रदेश के विभिन्न बांधों और जलाशयों से होने वाले पानी के वाष्पीकरण का वैज्ञानिक और गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई शहरों में लगातार बढ़ रहा धुंध का स्तर गंभीर चिंता का विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने अधिकारियों से यह भी अध्ययन करने को कहा कि क्या बांधों और जलाशयों से होने वाला वाष्पीकरण बादल फटने जैसी घटनाओं से किसी प्रकार संबंधित है या नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में ऐसे विषयों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शोध करना समय की आवश्यकता है।
ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में ग्लेशियरों के पिघलने की दर और बाढ़ प्रबंधन से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तृत अध्ययन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है और इससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। ऐसे में समय रहते ठोस और वैज्ञानिक आधार पर नीति निर्माण आवश्यक है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में निर्माणाधीन विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने स्मार्ट मीटर योजना पर विस्तार से चर्चा की और फीडर बिलिंग की मैपिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 13 जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण कार्य के पूर्ण होने से राज्य की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में 1229 मेगावाट की वृद्धि हुई है, जो ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


