Sunday, February 1, 2026
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चिट्टा मुक्त हिमाचल” अभियान को गति देने के लिए संजीवनी संस्था सक्रिय


“प्रशासनिक तालमेल व कानूनी जागरूकता को बताया अनिवार्य

शिमला: प्रदेश को नशे की बढ़ती चपेट से मुक्त कराने के उद्देश्य से संजीवनी संस्था ने आज प्रेस क्लब शिमला में प्रेस वार्ता की। संस्था के अध्यक्ष महेंद्र धर्मानी ने बताया कि नशे, विशेषकर चिट्टा, के खिलाफ लड़ाई अब केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसके लिए प्रशासनिक जवाबदेही, कानूनी समझ और समाज की संयुक्त भागीदारी बेहद ज़रूरी है।

संस्था द्वारा 7 दिसंबर को “चिट्टा पर चोट” विषयक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई थी, जिसका उद्घाटन राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने किया। राज्यपाल ने प्रदेश को नशे से मुक्त करने के लिए सामूहिक और व्यवस्थित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में आईजीएमसी की मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. निधि, पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अरविंद नेगी और वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष वर्मा ने नशे की समस्या के चिकित्सा, प्रशासनिक और कानूनी पक्षों पर विस्तृत चर्चा की।

प्रेस वार्ता में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि नशे के खिलाफ लड़ाई तभी प्रभावी हो सकती है जब सरकारी विभागों के बीच तालमेल मजबूत हो और प्रशासनिक तंत्र तेज़ व पारदर्शी तरीके से काम करे। धर्मानी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में केवल जागरूकता कार्यक्रमों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे, इसलिए ज़रूरी है कि पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसी संबंधित एजेंसियाँ एक दिशा में समन्वित ढंग से काम करें। उनके अनुसार जागरूकता का काम सामाजिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग द्वारा अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है, जबकि प्रशासन को कानून के क्रियान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।

नशे की रोकथाम में कानूनी शिक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया गया। धर्मानी ने कहा कि माता-पिता, युवाओं और संस्थाओं को नशे से संबंधित कानूनी प्रावधानों की समुचित जानकारी होनी चाहिए, जिससे समाज अपराध और जोखिमों को पहले ही पहचानकर रोकने की दिशा में कदम उठा सके।

संजीवनी संस्था प्रदेशभर में स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में जागरूकता शिविर संचालित कर रही है। इसके अलावा अभिभावक काउंसलिंग, जिला स्तरीय कार्यक्रम, सामुदायिक संवाद और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों को लोगों तक पहुँचाने का अभियान निरंतर जारी है। संस्था ने राज्यपाल के मार्गदर्शन में इस मिशन को और व्यापक पैमाने पर ले जाने की योजना भी घोषित की।

धर्मानी ने कहा कि नशा केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के भविष्य पर खतरा है। इसे समाप्त करने के लिए समाज और प्रशासन दोनों की समान भूमिका आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि सभी पक्ष एक साथ मिलकर ईमानदारी से प्रयास करें, तो हिमाचल को नशे की समस्या से बाहर निकाला जा सकता है।

प्रेस वार्ता में संजीवनी संस्था के महासचिव नरेश शर्मा, सलाहकार जोगिंदर कंवर, उपाध्यक्ष रतन ठाकुर और सुरेंद्र ठाकुर तथा कोषाध्यक्ष धर्म प्रकाश भी मौजूद रहे।

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