संवैधानिक पद की गरिमा को तार-तार कर रहीं वर्तमान अध्यक्षा, महिला आयोग को कांग्रेस का राजनीतिक मंच बनाना शर्मनाक : डेज़ी ठाकुर
शिमला, हिमाचल प्रदेश महिला आयोग की पूर्व अध्यक्षा एवं वर्तमान में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष डेज़ी ठाकुर ने महिला आयोग की मौजूदा अध्यक्षा विद्या नेगी के आचरण पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि एक संवैधानिक पद पर बैठी महिला से जिस संवेदनशीलता, निष्पक्षता और गरिमा की अपेक्षा होती है, वह वर्तमान अध्यक्षा के आचरण में पूरी तरह नदारद है।
डेज़ी ठाकुर ने कहा कि धर्मशाला में एक बेटी की दर्दनाक मौत, जिसका कारण रैगिंग बताया जा रहा है, पूरे प्रदेश और देश के लिए गहरा आघात है। ऐसे संवेदनशील और पीड़ादायक मामले में राजनीति करना न केवल अमानवीय है, बल्कि महिला आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान की आत्मा पर भी प्रहार है। जहां एक ओर पूरा समाज पीड़िता और उसके परिवार के दुख में सहभागी है, वहीं दूसरी ओर महिला आयोग की अध्यक्षा इस दुख को भी राजनीतिक लाभ के लिए भुनाने में लगी हुई हैं।
डेज़ी ठाकुर ने विशेष तौर पर ऑल इंडिया महिला कांग्रेस के एक्स (X) अकाउंट से साझा की गई उस फोटो पर सवाल उठाए, जिसमें पीड़िता के परिवार से मिलने का दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि मीडिया द्वारा इस फोटो को झूठा और भ्रामक बताया जाना अत्यंत गंभीर विषय है। यदि वास्तव में संवेदना होती, तो पहले पीड़ित परिवार से मिलकर उनका दुख साझा किया जाता, न कि सोशल मीडिया पर जल्दबाज़ी में फोटो डालकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जाती।
उन्होंने कहा कि “महिला आयोग कोई राजनीतिक अखाड़ा नहीं है। यह एक संवैधानिक संस्था है, जिसका उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाना है, न कि कांग्रेस पार्टी के प्रचार का मंच बनना।” एक पूर्व महिला आयोग अध्यक्षा होने के नाते डेज़ी ठाकुर ने स्पष्ट कहा कि इस पद पर रहते हुए व्यक्तिगत या दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना संवैधानिक जिम्मेदारी होती है, जिसे वर्तमान अध्यक्षा पूरी तरह भूल चुकी हैं।
डेज़ी ठाकुर ने आरोप लगाया कि विद्या नेगी ने महिला आयोग की साख को गहरा नुकसान पहुंचाया है। झूठी तस्वीरें और भ्रामक दावे न केवल पीड़ित परिवार की पीड़ा को बढ़ाते हैं, बल्कि उन हजारों महिलाओं के विश्वास को भी तोड़ते हैं, जो न्याय की उम्मीद लेकर महिला आयोग का दरवाजा खटखटाती हैं।
उन्होंने मांग की कि विद्या नेगी तत्काल इस पूरे प्रकरण पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करें और प्रदेश की जनता व पीड़ित परिवार से माफी मांगें। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महिला आयोग को राजनीतिक उपकरण की तरह इस्तेमाल करना बंद नहीं किया गया, तो भाजपा महिला मोर्चा इस मुद्दे को प्रदेशभर में उठाने से पीछे नहीं हटेगा।


