शिमला में सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के रिहायशी क्षेत्र देवली कॉलोनी में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब लोगों ने एक आवारा कुत्ते को अपने मुंह में नवजात शिशु को लेकर घूमते हुए देखा। यह दर्दनाक मामला पुलिस थाना ढली क्षेत्र का है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग स्तब्ध रह गए और तुरंत पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू की। कुत्ते के मुंह से बरामद किया गया नवजात एक लड़का था, जो उस समय मृत अवस्था में पाया गया।
पुलिस के अनुसार नवजात के सिर, चेहरे और पीठ पर गंभीर जख्म थे। प्रथम दृष्टया आशंका जताई जा रही है कि किसी आवारा कुत्ते ने शिशु को नोचा या खाया है। इस भयावह दृश्य ने मौके पर मौजूद हर व्यक्ति को भीतर तक झकझोर दिया।
पुलिस ने नवजात के शव को कब्जे में लेकर नियमानुसार इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला भेजा, जहां पोस्टमार्टम किया गया। डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम के बाद बिसरा सहित अन्य आवश्यक नमूने सुरक्षित कर लिए हैं, ताकि मौत के कारणों की गहराई से जांच की जा सके।
फिलहाल पुलिस नवजात की पहचान के लिए आसपास के इलाकों में लगातार पूछताछ कर रही है। यह भी जांच का विषय है कि नवजात को किन परिस्थितियों में वहां छोड़ा गया। पुलिस इस संभावना से भी इनकार नहीं कर रही कि जन्म के बाद किसी सामाजिक दबाव, पारिवारिक भय या बदनामी के डर के चलते शिशु को लावारिस हालत में छोड़ दिया गया हो। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
शिशु की पहचान न हो पाने के कारण शव को फिलहाल आईजीएमसी शिमला के शवगृह में सुरक्षित रखा गया है। इस मामले में पुलिस थाना ढली में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 94 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच हर पहलू से की जा रही है—चाहे वह लापरवाही हो, अमानवीय कृत्य हो या कोई आपराधिक साजिश। जांच पूरी होने के बाद ही इस दर्दनाक घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
यह घटना समाज के लिए एक कठोर चेतावनी है, कि तकनीक और विकास के दौर में भी मानवता कहीं न कहीं दम तोड़ती नजर आ रही है।


