Saturday, July 13, 2024
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अच्छा लेखन रातोंरात नहीं आता बल्कि निरंतर अभ्यास और अच्छे विचारों से विकसित होता है : कुलपति

लेखन एक कला
एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के वेबिनार में विशेषज्ञों ने छात्रों को दिए सफल लेखन कार्यों के लिए टिप्स

शिमला, एपीजी शिमला विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित की जा रही वेबिनार सीरीज के तहत सोमवार को अंग्रेज़ी विभाग की अध्यक्षा प्रो. डॉ. कुशा पंडित चावला ने व्यक्तिगत लेखन, अकादमिक लेखन व व्यवसायिक विषय पर एक दिवसीय वेबिनार आयोजित करवाया जिसकी अध्यक्षता एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. रमेश चौहान ने बतौर मुख्यातिथि की। कार्यक्रम में एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के छात्र, अक्ल विश्वविद्यालय के छात्र और प्राध्यापक उपस्थित रहे।इस कार्यक्रम की संयोजकता अंग्रेज़ी विभाग में सहायक प्रो.हिमाद्रि ठाकुर ने की जबकि अक्ल विश्वविद्यालय बठिंडा की ओर से सहायक प्रो.अपूर्वा लोहुमी ने बतौर विषय विशेषज्ञ कार्यक्रम में शिरकत की।कार्यक्रम की शुरुआत सहायक प्रो. हिमाद्रि ठाकुर के स्वागत भाषण के साथ हुई जबकि प्रो. डॉ. कुशा पंडित ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छात्रों के पेशेवर लेखन, अकादमिक लेखन व व्यक्तिगत लेखन और भाषीय लेखन व्यक्ति के सफल व्यक्तित्व को दर्शाता है और यह सटीक लेखन कला छात्रों को उनके करियर में मदद करती है। कुलपति प्रो. डॉ. रमेश चौहान ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि लेखन आसान विधा नहीं है, बल्कि यह एक कला है और यह निरंतर अध्ययन, लेखन का अभ्यास है। कुलपति चौहान ने कहा कि अधिकांश छात्रों व लोगों को अकादमिक, व्यवसायिक व व्यक्तिगत जीवन में लेखन संबंधित कठिनाई आती है जिसे अभ्यास, पुस्तकें पढ़ना, लिखना, शब्दावली के ज्ञान से दूर किया जा सकता है। कुलपति ने कहा कि एक अच्छा लेखक होना और एक अच्छा जर्नलिस्ट होना उसका प्रभावशाली लेखन, आकर्षक शब्दावली और विचार व व्यक्तित्व होता है तभी वह लिख पाता है। मुख्य वक्ता अपूर्वा लोहुमी ने छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि लेखन एक ऐसा कौशल है जिसे कोई भी नियमित अभ्यास और धैर्य के साथ सीख सकता है। अपूर्वा लोहुमी ने व्यक्तिगत लेखन, व्यवसायिक लेखन, अकादमिक लेखन और अन्य कई लेखन विधाओं पर प्रकाश डाला और कहा कि अकादमिक लेखन व्यक्तिगत लेखन से अलग है और इसका एक निर्धारित प्रारूप है। अपूर्वा ने कहा कि छात्रों को अकादमिक लेखन के दौरान एक उद्देश्यपूर्ण एवं तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाने, साक्ष्य आधारित लेखन के साथ सरल भाषा को अपनाने और सार्वजनिक राय एवं विशेषज्ञ विचारों की सलाह दी। उन्होंने कहा कि छात्र अपने कुशल लेखन व संप्रेषण द्वारा व्यवसायिक लेखन, रिपोर्ट, शोधपत्र, पत्र, भाषण, लेख, रेज़्यूमे लेखन में सफलता हासिल कर सकते हैं और जॉब पाने के लिए नियोक्ता को अपने लेखन से प्रभावित कर सकते हैं , साथ ही अच्छे लेखक भी बन सकते हैं परंतु यह इतना आसान नहीं है, अतः इन सभी कार्यों के लिए व्यक्ति को अपने लेखन कौशल को विकसित करने के लिए निरंतर अध्ययन व लेखन की आवश्यकता होती है और जो जितना अभ्यास करेगा उतना लेखन में विकसित होगा। वेबिनार के अंत में छात्रों ने विषय विशेषज्ञ से सवाल पूछकर लेखन से जुड़ी शंकाओं को दूर किया और विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. कुशा पंडित ने वेबिनार को संपन्न करते हुए कहा कि अच्छा लेखन के लिए अच्छे विचार सबसे पहले होने चाहिए क्योंकि जो व्यक्ति ऊंचे विचार रखने वाला होता है वह बहुत अच्छा लेखक भी साबित होता है परंतु इस लेखन विधा को रातोंरात नहीं सीखा जा सकता, यह निरंतर अभ्यास से ही विकसित होता है और इसमें रुचि होना पहली शर्त है। कार्यक्रम के दौरान एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल कुमार पाल, डीन एकेडेमिक्स प्रो. डॉ. कुलदीप कुमार सहित कई संकायों व विभागों के विभागाध्यक्ष कानून व विधि विभाग से विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. लोकेश चंदेल, विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील ठाकुर, विभागाध्यक्ष डॉ. कमल कश्यप, डीन प्रो. डॉ.नील सिंह, विभागाध्यक्ष नवीन ठाकुर, परीक्षा नियंत्रक अफ़ज़ल खान, विभागाध्यक्ष चेतन मेहता, विभागाध्यक्ष कल्पना वर्मा और वरिष्ठ अधिकारी गण, कार्यकारी अधिकारी ज्योत्सना शर्मा और प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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