Tuesday, March 3, 2026
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CBSE स्कूलों में अध्यापक नियुक्ति प्रक्रिया पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को दो सप्ताह में जवाब देने के निर्देश

CBSE स्कूलों में अध्यापक नियुक्ति प्रक्रिया पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को दो सप्ताह में जवाब देने के निर्देश
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई एफिलिएटिड स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ विवाद अब हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय पहुंच गया है। विभिन्न शिक्षक संगठनों के ज्वाइंट फ्रंट द्वारा दायर याचिका पर मंगलवार को न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र नेगी की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया और राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव भूषण ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा 134 स्कूलों को Central Board of Secondary Education से एफिलिएट करने का निर्णय नीतिगत हो सकता है, जिस पर शिक्षकों को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन इन स्कूलों में कार्यरत या चयनित शिक्षकों के लिए जो नई चयन प्रक्रिया तय की गई है, वह विवाद का विषय है। उन्होंने तर्क दिया कि आयोग से चयनित और वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को दोबारा चयन प्रक्रिया से गुजरने के लिए बाध्य करना अनुचित है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि केवल ऑब्जेक्टिव टाइप टेस्ट के आधार पर चयन करना शिक्षकों के अनुभव और सेवा को नजरअंदाज करता है, जिससे उनके मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 22 तारीख को चयन परीक्षा प्रस्तावित है, ऐसे में सरकार को 12 मार्च से पहले जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार एक ओर Himachal Pradesh Board of School Education (HPBOSE) के स्तर पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की ऑब्जेक्टिव परीक्षा उसी बोर्ड से आयोजित करवा रही है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि यदि 134 स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने से शिक्षा का स्तर सुधरेगा, तो क्या प्रदेश के शेष स्कूलों में शिक्षा का स्तर संतोषजनक नहीं है? इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में भी असमंजस की स्थिति बन सकती है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया है। अब 12 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष स्पष्ट होने के बाद ही आगे की दिशा तय होगी।

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