ऊना : जनप्रतिनिधि सही मायने में वही होता है, जिसे दूसरे का दर्द अपना दर्द लगे। मुसीबत के मारे लोगों को दुख के भंवर से बाहर निकाल लाए और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को उसका जायज हक दिलाने के लिए मशक्कत करे। विधानसभा क्षेत्र गगरेट के विधायक भी एक ऐसे परिवार के लिए भगवान का दूसरा रूप बनकर आए हैं, जो न सिर्फ दिव्यांग है बल्कि उसके सिर पर एक अदद छत तक नहीं जिसके नीचे बैठकर वह अपनी जिंदगी बसर कर सके। इसके लिए विधायक राजेश ठाकुर ने किसी सरकारी योजना का इंतजार नहीं किया बल्कि अपनी जेब से पैसा खर्च कर इस परिवार के लिए कोरोना क र्यू के दौरान ही छत खड़ी कर दी। उपमंडल गगरेट के गोंदपुर बनेहड़ा के रमेश चंद भी अब छाती तान के बता सकेंगे कि ये उनका घर है। गोंदपुर बनेहड़ा के रमेश चंद पेशे से नाई हैं। अगर कोई ग्राहक आ जाए तो घर में चूल्हा जलने की आस हो जाती है, लेकिन कोरोना कफ्र्यू के दौरान तो यह आस भी खत्म हो गई है। गोंदपुर बनेहड़ा में विधायक राजेश ठाकुर कुछ दिन पहले जब कोरोना संक्रमित मरीजों को राशन देने पहुंचे तो किसी ने उन्हें रमेश चंद की व्यथा सुनाई। जिस पर विधायक राशन लेकर रमेश चंद से मिलने चले गए। रमेश चंद की पत्नी बचपन से ही पोलियोग्रस्त है, तो रमेश चंद की एक टांग काम नहीं करती। जिस ढारे में वह रहता है न उसकी छत और न ही दरवाजा। यहां तक कि घर में शौचालय तक की व्यवस्था नहीं लेकिन अफसोस कि रमेश चंद का नाम बीपीएल सूची में भी शामिल नहीं जिसके चलते उसे वह सुविधाएं भी नहीं मिल सकती थीं जिसका वह हकदार था। इस परिवार की ये हालत देख विधायक राजेश ठाकुर इस कद्र विचलित हुए कि उन्होंने अपनी जेब से ही रमेश चंद का घर बनाने का ऐलान कर दिया। आमतौर पर नेताओं की घोषणाएं भी हवा-हवाई ही होती हैं लेकिन वचन के पक्के विधायक राजेश ठाकुर ने समय गंवाए बगैर रमेश चंद के घर का काम शुरू करवाया और अब छत बनकर तैयार है।


